उज्जैन में सराफा स्कूल को दाऊदखेड़ी में शिफ्ट करने के विरोध में 300-350 छात्राओं ने कलेक्ट्रेट घेरा। प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान 2 छात्राएं बेहोश हो गईं, जिन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। प्रदर्शन में एक छात्रा रोने लगी और कहा- हमारा भविष्य बर्बाद मत करिए।
शहर को 15 km दूर स्कूल
छात्राओं का कहना है कि स्कूल को शहर से करीब 12-15 किलोमीटर दूर दाऊदखेड़ी शिफ्ट किया जा रहा है। इतनी दूर स्कूल जाने में आने-जाने और सुरक्षा की परेशानी होगी। दाऊदखेड़ी तक स्कूल पहुंचने में सुरक्षा, परिवहन और रोजाना आने-जाने की परेशानियों को लेकर चिंता है। स्कूल शहर से बाहर या फिर दूर शिफ्ट होने पर विद्यार्थियों और उनके परिवारों पर आने-जाने का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
रोने लगी छात्राएं
छात्राओं के लिए लंबी दूरी और कई बार बस बदलकर स्कूल पहुंचना परेशानी का कारण बन सकता है। अगर स्कूल शहर से बाहर शिफ्ट किया जाता है तो छात्राओं के आने-जाने और सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। प्रदर्शन के दौरान कई छात्राएं रोने लगी, और अपनी मांगें रखते हुए रोने लगीं। छात्राओं ने स्कूल को वर्तमान स्थान पर ही संचालित रखने की मांग की। प्रदर्शन करीब 4 घंटे तक चला। शुरुआत में छात्राओं से बातचीत के लिए कोई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, जिसके बाद नाराजगी और बढ़ गई।

DEO ने दिया आश्वासन
बाद में जिला शिक्षा अधिकारी महेंद्र खत्री कलेक्ट्रेट पहुंचे और छात्राओं से बात की। छात्राओं ने मौखिक आश्वासन मानने से इनकार करते हुए लिखित में आश्वासन देने की मांग की। इसके बाद DEO की ओर से लिखित आश्वासन दिया कि अभिभावकों की बैठक और उनकी सहमति के बिना स्कूल शिफ्ट नहीं किया जाएगा। आश्वासन मिलने के बाद छात्राओं ने अपना धरना समाप्त किया। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर स्थानीय कांग्रेस विधायक महेश परमार भी कार्यकर्ताओं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे।