UCC का फाइनल प्रतिवेदन सौंपा गया

समिति ने सीएम डॉ. मोहन का सौंपा UCC का फाइनल प्रतिवेदन, 3 खंडों में है पूरी कहानी

 मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समिति के सदस्यों को दिया धन्यवाद, प्रतिवेदन के दूसरे खंड में है विधेयक का प्रारूप, अनुसूचित जनजातियों को यूसीसी से बाहर रखने की अनुशंसा 

By : आशुतोष शर्मा
समिति ने सीएम डॉ. मोहन का सौंपा UCC का फाइनल प्रतिवेदन, 3 खंडों में है पूरी कहानी

भोपाल। समान नागरिक संहिता (UCC) के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने 13 जुलाई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को संहिता का फाइनल प्रतिवेदन सौंपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समय-सीमा में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने पर अध्यक्ष सहित सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया। इस अवसर पर समिति के सदस्य प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और समिति के सदस्य सचिव अजय कटेसरिया उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को सौंपे गए प्रतिवेदन में समिति की रिपोर्ट 3 खण्डों में संकलित है। पहले खंड में समिति की अनुशंसाओं का प्रतिवेदन है और इसमें समिति ने अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय एवं राज्य के विभिन्न विधियों एवं प्रथाओं का विश्लेषण कर अपनी अनुशंसाएं प्रतिवेदित की है। इस खंड में 10 अध्याय है। प्रतिवेदन का दूसरा खंड विधेयक के प्रारूप के रूप में है। समिति द्वारा प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप को मध्यप्रदेश में प्रचलित विधियों एवं नियमों के दृष्टिगत तैयार किया गया है। प्रस्तावित विधेयक के 4 भाग, 404 धाराएं एवं 7 अनुसूचियां है। तीसरे खंड में जन परामर्श प्रतिवेदन है, जिसमें समिति द्वारा जिला स्तर, राज्य स्तर एवं वेबसाइट के माध्यम से किए गए व्यापक जन-परामर्श का विवरण है। समिति को 9.58 लाख से अधिक परामर्श प्राप्त हुए थे। उनका प्रश्नवार, लिंगवार एवं समुदायवार विश्लेषण इस खंड में शामिल है। समिति ने अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता से बाहर रखने की अनुशंसा की है। 

विधि विभाग को हस्तांतरित प्रतिवेदन
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति को विभिन्न व्यक्तिगत एवं पारिवारिक विषयों, जैसे विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण तथा लिव-इन संबंधों से संबंधित प्रचलित व्यवस्थाओं के अध्ययन करने का दायित्व सौंपा गया था। समिति ने उक्त अनुसार मध्यप्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक तथा आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप प्रारूप तैयार करने का कार्य किया है। समिति ने मूल आधार, लैंगिक समानता सुनिश्चित करना, विविध अनुष्ठानिक प्रथाओं को अप्रभावित रहने देना, प्रचलित रीति-रिवाजों एवं प्रथाओं का सम्मान करना एवं संवैधानिक उपबंधों एवं लोकनीति की दिशा में कार्य किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा समिति की अध्यक्ष सर्वोच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई, समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह एवं सदस्य अनूप नायर का भी धन्यवाद ज्ञापित किया जो व्यक्तिगत कारणों से उपस्थित नहीं हो सके। समिति द्वारा प्राप्त प्रतिवेदन राज्य शासन के विधि विभाग को हस्तांतरित कर दिया गया है। विधेयक के परिमार्जन एवं वरिष्ठ सचिव समिति की प्रक्रिया के बाद विधेयक मंत्रि-परिषद की स्वीकृत के बाद मानसून सत्र में ही विधानसभा में रखे जाने की संभावना है।

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