मध्यप्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई जारी रखने का फैसला दोहराया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप प्रदेश में पारदर्शी, संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन सुनिश्चित करने के लिए भ्रष्ट आचरण करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में भोपाल जिला प्रशासन ने रिश्वत के आरोपी पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। यह कार्रवाई विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त भोपाल के प्रकरण में की गई है। सरकार का कहना है कि नागरिकों को शासकीय सेवाएं बिना किसी बाधा और पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराना उसकी प्राथमिकता है।
फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू के बदले रिश्वत का आरोप
मामला भोपाल के कोलार क्षेत्र से जुड़ा है। पटवारी मंगलेश खण्डेलवाल पर मकान के फर्जी नामांतरण और लीज रिन्यू कराने के एवज में 8 हजार रुपये की रिश्वत लेने का आरोप है। विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त भोपाल द्वारा उन्हें कथित तौर पर रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा गया था। इसके बाद मामले में विधिवत कार्रवाई की गई। राजस्व संबंधी कामकाज में अनियमितता और भ्रष्टाचार को लेकर प्रशासन पहले से ही निगरानी कर रहा है। इसी मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों की जांच कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई है।
कलेक्टर ने दी अभियोजन चलाने की मंजूरी
प्रकरण में अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने उपलब्ध अभिलेखों और मामले में सामने आए तथ्यों का परीक्षण किया। जांच के बाद प्रस्तुत प्रतिवेदन में पटवारी द्वारा शासकीय दायित्वों के निर्वहन में उदासीनता और लापरवाही बरते जाने के साथ भ्रष्टाचार संबंधी कृत्य में प्रथम दृष्टया संलिप्तता सामने आने की बात कही गई। इसके आधार पर अभियोजन स्वीकृति देने की अनुशंसा की गई। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी भोपाल प्रियंक मिश्रा ने मामले से जुड़े तथ्यों और अभिलेखों का सम्यक परीक्षण करने के बाद मंगलेश खण्डेलवाल के खिलाफ प्रचलित कानूनी प्रावधानों के तहत अभियोजन चलाने की स्वीकृति प्रदान कर दी है।
पारदर्शी प्रशासन पर सरकार का फोकस
राज्य शासन का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में वैधानिक प्रक्रिया के तहत सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के लिए ऐसे मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है। सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत भ्रष्ट आचरण के मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। भोपाल के इस मामले में अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद अब आरोपी पटवारी के खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।