मध्य प्रदेश में चीता पुनर्वास परियोजना को बुधवार को एक और महत्वपूर्ण विस्तार मिला। सागर के रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों, नर ‘वियोम’ और मादा ‘नीरा’ का आगमन हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों चीतों का उनके नए बसेरे में स्वागत करते हुए इसे प्रदेश में चीता संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 7 अक्टूबर का दिन विशेष है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में 25 वर्ष पूरे किए हैं। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री की उपस्थिति में ही चीता प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई थी।
रानी दुर्गावती रिजर्व बना चीतों का तीसरा बसेरा
CM डॉ. मोहन यादव ने कहा कि रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश में चीतों का तीसरा बसेरा बना है। यहां बाघों के साथ चीतों के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है।
उन्होंने कहा कि एशिया से विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति का मध्य प्रदेश में सफल पुनर्वास वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उदाहरण है। शुरुआती आठ चीतों से शुरू हुआ सफर अब 60 चीतों तक पहुंच चुका है।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, चीतों की बढ़ती संख्या प्रदेश में मजबूत वन्यजीव प्रबंधन और विकसित होते इकोसिस्टम का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि चीता पुनर्वास परियोजना केवल वन्यजीव संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
वन्यजीव संरक्षण के साथ पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि चीतों के लिए नए आवास विकसित होने से प्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को भी गति मिलने की संभावना है। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों के लिए तैयार किया गया अनुकूल वातावरण संरक्षण के प्रयासों को आगे बढ़ाने में मदद करेगा।

उन्होंने कहा कि वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन के बीच बेहतर समन्वय से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इससे प्रदेश में प्राकृतिक पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
PM मोदी को दी बधाई
CM डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निर्वाचित जनप्रतिनिधि के रूप में 25 वर्ष पूरे करने पर पुनः बधाई दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत निरंतर प्रगति कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि सभी मिलकर संकल्प लें कि अमृतकाल तक भारत को विश्व का अग्रणी राष्ट्र बनाने की दिशा में निरंतर कार्य किया जाएगा। उन्होंने चीता पुनर्वास परियोजना को इसी व्यापक विकास यात्रा और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों से जोड़ते हुए मध्य प्रदेश की भूमिका को रेखांकित किया।