बहुचर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले में पहली बार आरोपी गिरिबाला सिंह की ओर से उनके अधिवक्ता इनोश जॉर्ज कार्लो मीडिया के सामने आए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके मुवक्किलों ने कभी भी वॉयस सैंपल देने से इनकार नहीं किया। उनका कहना है कि इस मामले में अदालत की आदेश पत्रिका ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट करती है और उसी के आधार पर तथ्यों को देखा जाना चाहिए।
वॉयस सैंपल देने की प्रक्रिया में सहयोग किया
अधिवक्ता कार्लो के मुताबिक, सीबीआई ने वॉयस सैंपल लेने के दौरान आरोपियों को जो ट्रांसक्रिप्ट पढ़ने के लिए दी थी, उसे लेकर कुछ कानूनी शंकाएं थीं। उन्होंने कहा कि किसी भी आरोपी को अपने वकील से कानूनी सलाह लेने का अधिकार होता है, लेकिन उस समय पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। इसके बावजूद गिरिबाला सिंह ने करीब तीन घंटे तक वॉयस सैंपल देने की प्रक्रिया में सहयोग किया।
ट्रांसक्रिप्ट पढ़कर वॉयस सैंपल देने में कोई आपत्ति नहीं
कार्लो ने दावा किया कि 11 जुलाई को ही उन्होंने सीबीआई को लिखित रूप से स्पष्ट कर दिया था कि उनके मुवक्किलों को ट्रांसक्रिप्ट पढ़कर वॉयस सैंपल देने में कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि जांच में शुरू से पूरा सहयोग किया गया है और डरने या कुछ छिपाने जैसी कोई बात नहीं है।
आदेश पत्रिका में भी दर्ज
वकील के अनुसार, सोमवार को अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों आरोपियों से सीधे पूछा कि क्या उन्हें वॉयस सैंपल देने में कोई आपत्ति है। दोनों ने अदालत के सामने स्पष्ट रूप से सहमति जताई। कार्लो का दावा है कि यह तथ्य अदालत की आदेश पत्रिका में भी दर्ज है।
कानूनी रूप से मजबूत बनी रहे
उन्होंने यह भी कहा कि जब आरोपियों ने अदालत के समक्ष सहमति दे दी, तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 349 के तहत सीबीआई के आवेदन पर आगे बहस की आवश्यकता नहीं रह गई। साथ ही उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2016 के *सुधीर कुमार बनाम स्टेट ऑफ दिल्ली* फैसले का हवाला देते हुए कहा कि वॉयस सैंपल लेने की पूरी प्रक्रिया तय दिशा-निर्देशों के अनुरूप और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि जांच निष्पक्ष और कानूनी रूप से मजबूत बनी रहे।