केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित आदिवासी सत्याग्रहियों ने गुरुवार को दिल्ली में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने परियोजना के कारण होने वाले विस्थापन, डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों और पुनर्वास से जुड़ी समस्याओं को राहुल गांधी के सामने रखा। प्रभावित लोगों ने बताया कि परियोजना के चलते लंबे समय से बसे गांवों और परिवारों के सामने विस्थापन का संकट खड़ा हो गया है। मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने अधिकारों, मुआवजे और पुनर्वास से जुड़ी मांगों पर भी चर्चा की। राहुल गांधी ने प्रभावित आदिवासी परिवारों की समस्याएं सुनीं और उनकी मांगों को लेकर समर्थन जताया। यह मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में विरोध और आंदोलन की गतिविधियां जारी हैं।
बोले- जल, जंगल और जमीन प्रभावित हो रहे
मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि परियोजना के कारण छतरपुर और पन्ना के आदिवासी समाज का जल, जंगल और जमीन प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्षों से बसे गांव डूब क्षेत्र में आ रहे हैं और लोगों के घर-आशियाने उजड़ने की स्थिति बन रही है। राहुल गांधी के मुताबिक इसी वजह से प्रभावित परिवारों को आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समुदाय के लिए जल, जंगल और जमीन केवल संसाधन नहीं हैं, बल्कि उनके जीवन और आजीविका का आधार हैं। राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं पर सरकार से संवेदनशीलता के साथ विचार करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि विकास परियोजनाओं के साथ प्रभावित लोगों के अधिकार और पुनर्वास के मुद्दे को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पुलिस कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का आरोप
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों पर पुलिस बल का इस्तेमाल किया गया और उनके विरोध के अधिकार को दबाने की कोशिश हुई। उन्होंने कहा कि सरकार को आंदोलन कर रहे लोगों के साथ संवाद करना चाहिए था। राहुल गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने वाले लोगों के साथ बातचीत करना लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। हालांकि पुलिस कार्रवाई और आंदोलन से जुड़े आरोपों पर सरकार का पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल राहुल गांधी ने प्रभावित आदिवासी परिवारों के साथ खड़े होने की बात कही है।
बोले- न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास अधिकार
राहुल गांधी ने कहा कि किसी भी सरकारी परियोजना के लिए यदि लोगों के घर और गांव उजाड़े जा रहे हैं, तो प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास मिलना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर लोगों को उनके घर और जमीन से विस्थापित किया जाता है, तो उनके भविष्य और आजीविका की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। राहुल गांधी ने आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों पर जोर दिया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पन्ना और छतरपुर के आदिवासी समाज के सम्मान, अधिकार और न्याय की लड़ाई में वे और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों की मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा और उनके अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
पहले भी राहुल ने आंदोलन का वीडियो किया था शेयर
इससे पहले 27 जुलाई 2026 को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित किसानों और आदिवासियों के आंदोलन का एक वीडियो साझा किया था। पोस्ट में उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए लिखा था कि सरकार सत्य और सत्याग्रह से डरती है। उन्होंने आरोप लगाया था कि शांतिपूर्ण आंदोलन को पुलिस बल के जरिए दबाने की कोशिश की जा रही है। राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन पर अधिकार की बात कही थी। उन्होंने दावा किया था कि परियोजना में आदिवासियों की जमीन ली गई, लेकिन उन्हें न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास नहीं मिला। इस वीडियो में परियोजना से प्रभावित लोग आंदोलन करते नजर आए थे और बैकग्राउंड में कविता के स्वर भी सुनाई दे रहे थे।
कांग्रेस ने कहा- प्रभावित परिवारों के साथ संघर्ष जारी रहेगा
राहुल गांधी ने अपने पहले के पोस्ट में कहा था कि कांग्रेस प्रभावित आदिवासी परिवारों और किसानों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा था कि उन्हें न्याय दिलाने के लिए संघर्ष जारी रहेगा। राहुल गांधी के मुताबिक सरकार को प्रभावित परिवारों को न्यायपूर्ण मुआवजा और सम्मानजनक पुनर्वास देना होगा। केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर प्रभावित क्षेत्रों में जमीन, विस्थापन, मुआवजा और पुनर्वास जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में हैं। अब प्रभावित आदिवासियों की राहुल गांधी से मुलाकात के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक स्तर पर सामने आया है। कांग्रेस इस मामले को आगे भी उठाने की बात कह रही है। वहीं परियोजना से प्रभावित परिवारों की मांगों और सरकार की ओर से किए जा रहे पुनर्वास संबंधी इंतजामों पर भी नजर बनी हुई है।