पंजाब में निजी स्कूलों पर नया नियम

पंजाब में निजी स्कूल फीस पर सरकार की सख्ती, 4 साल की फीस का ब्योरा देना होगा; अतिरिक्त वसूली लौटानी पड़ेगी

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर नियंत्रण के लिए नया अध्यादेश लागू किया है, जिससे फीस में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों पर आर्थिक बोझ कम होगा।

पंजाब में निजी स्कूल फीस पर सरकार की सख्ती, 4 साल की फीस का ब्योरा देना होगा; अतिरिक्त वसूली लौटानी पड़ेगी

पंजाब सरकार ने निजी स्कूलों द्वारा मनमाने तरीके से फीस बढ़ाने पर रोक लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने 'पंजाब गैर सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों की फीस विनियमन (संशोधन) अध्यादेश, 2026' लागू कर दिया है। इसके साथ ही शिक्षा विभाग ने एक ऑनलाइन पोर्टल भी शुरू किया है, जहां सभी निजी स्कूलों को पिछले चार वर्षों की फीस का पूरा रिकॉर्ड अपलोड करना अनिवार्य होगा।

अभिभावकों को वापस करनी होगी

नई व्यवस्था के तहत सरकार निजी स्कूलों की फीस वृद्धि की समीक्षा करेगी। यदि किसी स्कूल ने निर्धारित सीमा से अधिक फीस बढ़ाई है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन स्कूलों ने पिछले तीन वर्षों में सालाना 5 प्रतिशत से अधिक या कुल मिलाकर 15 प्रतिशत से ज्यादा फीस बढ़ाई है, उन्हें अतिरिक्त वसूली गई राशि एक महीने के भीतर अभिभावकों को वापस करनी होगी।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि शिक्षा सेवा का माध्यम है, इसे किसी भी कीमत पर व्यवसाय नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य अभिभावकों को अनावश्यक आर्थिक बोझ से राहत देना और फीस व्यवस्था में पारदर्शिता लाना है।

वह नियमों के अनुरूप

शिक्षा विभाग के नए ऑनलाइन पोर्टल के जरिए सरकार सभी निजी स्कूलों की फीस संरचना की निगरानी करेगी। स्कूलों को पिछले चार वर्षों की फीस का पूरा विवरण अपलोड करना होगा, जिससे यह पता लगाया जा सके कि फीस में कितनी बढ़ोतरी की गई और वह नियमों के अनुरूप है या नहीं।

सरकार ने फीस संबंधी शिकायतों के निपटारे की जिम्मेदारी संबंधित जिले के उपायुक्त (डीसी) को सौंपी है। यदि किसी अभिभावक को लगता है कि स्कूल ने नियमों से अधिक फीस वसूली है, तो वह शिकायत दर्ज करा सकेगा। जांच के बाद अतिरिक्त वसूली साबित होने पर स्कूलों को अभिभावकों का पैसा लौटाना होगा।

एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा

पंजाब सरकार का मानना है कि इस फैसले से निजी स्कूलों की फीस पर प्रभावी नियंत्रण होगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। साथ ही, शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
 

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