MP में होली से पहले सफर पर ब्रेक, 2 मार्च को थम जाएंगे 20 हजार बसों के पहिए

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MP में होली से पहले सफर पर ब्रेक, 2 मार्च को थम जाएंगे 20 हजार बसों के पहिए

mp में होली से पहले सफर पर ब्रेक 2 मार्च को थम जाएंगे 20 हजार बसों के पहिए

mp bus strike: होली से ठीक पहले सफर की तैयारी कर रहे लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मध्यप्रदेश में 2 मार्च को निजी बस संचालकों ने प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। अगर हड़ताल हुई, तो करीब 20 हजार बसों के पहिए थम जाएंगे। ट्रेनों में पहले से लंबी वेटिंग और कन्फर्म टिकट की कमी के बीच यह स्थिति यात्रियों की चिंता और बढ़ा रही है.राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में बस सेवाओं के ठप होने का सीधा असर त्योहार से पहले आवाजाही पर पड़ सकता है। ऐसे में यात्रियों को वैकल्पिक साधन ढूंढने पड़ सकते हैं।

mp bus strike:हड़ताल की वजह

हड़ताल की वजह राज्य की परिवहन नीति को लेकर बस संचालकों की नाराजगी बताई जा रही है। संचालकों का कहना है कि मोटर व्हीकल कानून में परमिट को किराए पर देकर बस संचालन कराने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है, इसके बावजूद इस मॉडल को लागू करने की कोशिश की जा रही है. बस ऑपरेटर इसे “परमिट ट्रैफिकिंग” की आशंका से जोड़ रहे हैं। उनका दावा है कि इससे आने वाले समय में बड़ी और मल्टीनेशनल कंपनियों को फायदा मिलेगा, जबकि स्थानीय और छोटे बस संचालक नुकसान में चले जाएंगे।

mp bus strike: परमिट और कानून को लेकर आपत्ति

बस संचालकों ने व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLT) सिस्टम में तकनीकी खामियों और ठेकेदार आधारित व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इससे उन्हें आर्थिक नुकसान हो रहा है. इसके अलावा नए पंजीयन, फिटनेस, स्थायी अनुज्ञा और नवीनीकरण में हो रही देरी, साथ ही अस्थायी परमिट पर लगाए गए प्रतिबंध को भी हड़ताल की बड़ी वजह बताया जा रहा है।

55 जिलों में असर, यात्रियों की बढ़ेगी परेशानी

हड़ताल का असर प्रदेश के सभी 55 जिलों में पड़ने की बात कही जा रही है। सामान्य दिनों में जहां 12 से 15 हजार बसें सड़कों पर रहती हैं, वहीं हड़ताल के दिन लगभग 20 हजार बसों के बंद रहने का दावा किया गया है। इनमें परमिटधारी और कॉन्ट्रैक्ट, दोनों तरह की बसें शामिल हैं।

छोटे संचालकों के खिलाफ प्रस्ताव?

मध्य प्रदेश बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के मुताबिक प्रदेश में करीब 12,780 परमिट वाली और 7 हजार से ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट बसें संचालित हैं. बस संचालकों का कहना है कि सरकार से कई बार समस्याओं को लेकर बातचीत की गई, लेकिन समाधान नहीं निकला। इसी वजह से ऑपरेटरों में आक्रोश है और हड़ताल का रास्ता अपनाया गया है। बस मालिकों का दावा है कि यदि परमिट निरस्त कर एक ही कंपनी के नाम पर स्थानांतरण का प्रस्ताव लागू होता है, तो छोटे और मध्यम ऑपरेटरों के लिए यह गंभीर संकट बन जाएगा। अब निगाहें सरकार और बस संचालकों के बीच होने वाली बातचीत पर टिकी हैं, क्योंकि फैसला सीधा आम यात्रियों की सुविधा से जुड़ा है।

 

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