आदिवासी युवक की संदिग्ध हत्या

केसली के मंगेला गांव में संजू गौड़ की संदिग्ध मौत का मामला गरमाया,आदिवासी समुदाय ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध हत्या के बाद उसकी पत्नी को मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेज दिया गया है। स्थानीय समुदाय ने निष्पक्ष जांच की मांग की।

केसली के मंगेला गांव में संजू गौड़ की संदिग्ध मौत का मामला गरमाया,आदिवासी समुदाय ने मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

सागर (मप्र)- मध्य प्रदेश के सागर जिले के विकासखंड केसली के अंतर्गत आने वाले ग्राम मंगेला में एक आदिवासी युवक की संदिग्ध हत्या और उसके बाद पुलिस द्वारा उसकी पत्नी को ही मुख्य आरोपी बनाकर जेल भेजने का एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। इस घटनाक्रम से आक्रोशित स्थानीय आदिवासी समुदाय और ग्रामीण अंचलों के नागरिकों ने लामबंद होकर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। सागर कलेक्टर और अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) केसली के माध्यम से भेजे गए इस ज्ञापन में स्थानीय पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई गई है।

क्या है पूरा मामला? खेत में खून से लथपथ मिली थी लाश

प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम मंगेला का निवासी संजू गौड़, क्षेत्र के ही एक रसूखदार व्यक्ति गब्बर सिंह राजपूत के खेत पर रखवाली करने और फसलों में पानी देने (सिंचाई) का काम करता था। ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि दिनांक 06 मई 2026 की रात्रि को खेत मालिक गब्बर सिंह राजपूत द्वारा खेत पर ही खाने-पीने की एक पार्टी का आयोजन किया गया था। इसी दरमियान देर रात अज्ञात तत्वों द्वारा संजू गौड़ की बेरहमी से हत्या कर दी गई और उसकी लाश खेत में बने टपरे (झोपड़ी) के सामने फेंक दी गई।

'सबूत मिटाने की कोशिश और झूठा फंसाने की साजिश'

ज्ञापन में मृतक संजू गौड़ के परिजनों और आदिवासी समाज ने खेत मालिक पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के अनुसार, 07 मई की सुबह लगभग 5:00 बजे गब्बर सिंह राजपूत मृतक संजू के घर पहुंचा। उसने संजू की पत्नी तुलसा गौड़ और उसकी बड़ी बेटी राधा गौड़ को जगाया और कहा कि "संजू की तबीयत खराब है, चलो उसका इलाज कराना है।" जब तुलसा और उसकी बेटी खेत पर पहुंचीं, तो उन्होंने देखा कि संजू गौड़ खून से लथपथ मृत अवस्था में पड़ा था। आरोप है कि इसके बाद खेत मालिक ने चालाकी से तुलसाबाई की मदद से शव को अपनी ऑल्टो कार में रखवाया और इलाज का बहाना बनाकर देवरी अस्पताल ले गया। इतना ही नहीं, संजू की बड़ी बेटी राधा को घटनास्थल पर बर्तन और खून से सने कपड़े साफ करने को कहा। डर और घबराहट के माहौल में, तुलसा गौड़ ने भी गब्बर सिंह के कहे अनुसार तौलिए से खून साफ कर दिया, जिसे अब पुलिस और मुख्य आरोपी द्वारा सबूत मिटाने के झूठे आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने संजू को मृत घोषित कर दिया, जिसके बाद गब्बर सिंह ने मृतक के अन्य परिजनों को सूचना दी।

केसली पुलिस पर गंभीर आरोप: अवैध हिरासत और अमानवीय यातनाएं

आदिवासी समुदाय का आरोप है कि केसली थाने की पुलिस ने असली अपराधियों और आपराधिक प्रवृत्ति के रसूखदार खेत मालिक को बचाने के लिए पूरी कहानी को ही पलट दिया। ज्ञापन के अनुसार, पुलिस ने मृतक संजू की निर्दोष पत्नी तुलसा गौड़ और उसकी बेटी राधा को थाने में 3 से 4 दिनों तक अवैध हिरासत में रखा। इस दौरान उन्हें अत्यधिक अमानवीय और बर्बर यातनाएं दी गईं, और अंततः तुलसा गौड़ को ही हत्या के झूठे प्रकरण में संलिप्त कर जेल भेज दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि आरोपी पर पहले से भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, लेकिन पुलिस राजनीतिक या आर्थिक प्रभाव के कारण उसे संरक्षण दे रही है।

आदिवासी समाज में भारी असंतोष, निष्पक्ष जांच की मांग

इस घटना को लेकर पूरे केसली विकासखंड और सागर जिले के आदिवासी समाज में तीव्र आक्रोश व्याप्त है। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रकृति प्रेमी और सीधे-सरल स्वभाव के आदिवासी समाज को प्रताड़ित किया जा रहा है। पूर्व में भी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) सागर को इस संबंध में आवेदन दिए गए थे, परंतु स्थानीय स्तर पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने के कारण ग्रामीणों में गहरा असंतोष है। आदिवासी समाज ने मांग की है कि इस पूरे संवेदनशील हत्याकांड की जांच कम से कम पुलिस अधीक्षक (SP) अथवा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (Addl. SP) स्तर के अधिकारियों की विशेष टीम से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके और निर्दोष तुलसा गौड़ की रक्षा हो सके।

तीन दिन का अल्टीमेटम: आंदोलन की चेतावनी

ज्ञापन के अंत में नागरिकों और आदिवासी संगठन के पदाधिकारियों ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवस के भीतर उनकी न्यायोचित मांग पूरी नहीं की गई और मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं हुई, तो संपूर्ण आदिवासी समुदाय उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होगा। इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था की स्थिति के लिए पूरी तरह से शासन और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार होगा।

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