भोपाल। आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने वाली शिक्षा का अधिकार (RTE) योजना मध्यप्रदेश में अपने लक्ष्य से पीछे दिखाई दे रही है। तीन चरण की ऑनलाइन लॉटरी पूरी होने के बावजूद प्रदेश के निजी स्कूलों में करीब 15 हजार सीटें अब भी खाली हैं।शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सीटें आरक्षित कर देना पर्याप्त नहीं है। पात्र बच्चों तक योजना की जानकारी पहुंचाने और प्रवेश प्रक्रिया को अधिक सरल एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
1.22 लाख सीटें तय, फिर भी सभी बच्चों को प्रवेश नहीं
इस वर्ष प्रदेश के करीब 30 हजार निजी स्कूलों में आरटीई के तहत 1,22,551 सीटें निर्धारित की गई थीं। इसके लिए 2.10 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 1,78,714 आवेदन पात्र पाए गए।तीन चरणों की लॉटरी के बाद अधिकांश बच्चों को स्कूल आवंटित किए गए, लेकिन अब भी बड़ी संख्या में सीटें खाली हैं।
RTE 2026-27: प्रमुख आंकड़े
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विवरण
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संख्या
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पात्र विद्यार्थी
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1,78,714
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कुल आरटीई सीटें
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1,22,551
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स्कूल आवंटन
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1,17,536
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अब तक प्रवेश
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लगभग 1.07 लाख
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खाली सीटें
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करीब 15 हजार (प्रक्रिया पूरी होने के बाद अनुमानित)
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क्यों खाली रह रही हैं सीटें?
राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों के अनुसार, अधिकतर खाली सीटें छोटे निजी स्कूलों में हैं, जहां अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश नहीं कराना चाहते। इसके अलावा कुछ परिवारों के लिए स्कूल तक पहुंचना और अन्य खर्च भी चुनौती बन रहे हैं।
क्षेत्र सीमा नियम बना बड़ी बाधा
निजी स्कूल संचालकों का कहना है कि क्षेत्र सीमाबंदी (Area Restriction) के कारण कई गरीब परिवार योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर यदि कोई परिवार मूल रूप से रायसेन जिले का निवासी है, लेकिन रोजगार के लिए भोपाल में रह रहा है, तो वर्तमान नियमों के कारण वह अपने बच्चे का प्रवेश भोपाल के आरटीई स्कूल में नहीं करा सकता। ऐसे मामलों में बच्चों को मूल निवास क्षेत्र के स्कूल में ही प्रवेश लेने की पात्रता मिलती है।स्कूल संचालकों का कहना है कि प्रवासी मजदूर परिवारों के लिए यह नियम व्यावहारिक नहीं है।
20 जुलाई के बाद चौथे चरण पर फैसला
राज्य शिक्षा केंद्र के अपर संचालक डॉ. अरुण सिंह ने बताया कि तीसरे चरण में चयनित विद्यार्थियों को 20 जुलाई तक प्रवेश लेना है। इसके बाद यदि सीटें खाली रहती हैं तो चौथे चरण की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जाएगा।