मध्यप्रदेश में ‘प्रोजेक्ट चीता’ के विस्तार की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नीमच-मंदसौर जिले में स्थित गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य में मादा चीता ‘CCB 2’ को स्वछंद विचरण के लिए विमुक्त किया। राधा अष्टमी के शुभ अवसर पर मुख्यमंत्री ने मादा चीता का नामकरण ‘राधा’ किया। इसके साथ ही गांधीसागर अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।
गांधीसागर में दो नर और दो मादा चीतों का कुनबा
मादा चीता ‘राधा’ के आगमन से गांधीसागर अभयारण्य में अब दो नर और दो मादा चीते मौजूद हैं। यहां पहले से नर चीते ‘प्रभाष’ और ‘पावक’ तथा मादा चीता ‘धीरा’ मौजूद हैं। कूनो नेशनल पार्क के बाद गांधीसागर को देश में चीतों के दूसरे प्रमुख आवास के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य चीतों के संरक्षण और उनके प्राकृतिक आवास में प्रजनन की संभावनाओं को बढ़ावा देना है।
वन विभाग की टीम रखेगी ‘राधा’ के स्वास्थ्य पर नजर
मादा चीता ‘राधा’ को नए वातावरण में अनुकूलन के लिए वन विभाग की विशेष निगरानी में रखा जाएगा। टीम उसके स्वास्थ्य, व्यवहार, गतिविधियों और पर्यावरण के साथ तालमेल पर लगातार नजर रखेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि गांधीसागर में चीतों को बसाना प्रोजेक्ट चीता के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पिछले वर्ष छोड़े गए चीतों के स्वास्थ्य और नए परिवेश में उनके अनुकूलन की भी निगरानी की जा रही है।
इको-टूरिज्म और रोजगार के नए अवसरों की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में शुरू किए गए चीता पुनर्वास कार्यक्रम से वन्यजीव संरक्षण को बढ़ावा मिल रहा है। गांधीसागर क्षेत्र में चीतों की मौजूदगी से इको-टूरिज्म को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटन, गाइड सेवाओं और अन्य गतिविधियों के माध्यम से रोजगार एवं आजीविका के अवसर विकसित हो सकते हैं।
‘टाइगर स्टेट’ के साथ ‘चीता स्टेट’ के रूप में पहचान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश की जैव विविधता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश ने ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ‘चीता स्टेट’, ‘घड़ियाल स्टेट’ और ‘गिद्ध स्टेट’ के रूप में भी पहचान बनाई है। राज्य में असम से जंगली भैंसों को लाने और हाथियों की संख्या बढ़ने का भी उल्लेख किया गया। गांधीसागर में चीता संरक्षण की यह पहल मध्यप्रदेश के वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रयासों को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।