मध्य प्रदेश में अनाज की खरीद-बिक्री करने वाली कृषि मंडियों की 10 साल बाद नई ग्रेडिंग की गई है। इस बार पिछली ग्रेडिंग की तुलना में 54 मंडियां उच्च ग्रेड में पहुंची हैं। प्रदेश में अब 110 मंडियां ऐसी हैं, जिनकी सालाना आय 3 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
47 मंडियां A ग्रेड में
नई ग्रेडिंग में 47 मंडियों को A ग्रेड दिया गया है। इन मंडियों की मंडी टैक्स, लाइसेंस और अन्य शुल्क से सालाना आय 6 करोड़ रुपए से ज्यादा है। वहीं 63 मंडियां B ग्रेड में शामिल हैं, जिनकी सालाना आय 3 से 6 करोड़ रुपए के बीच है।
लाखों टन अनाज की आवक
इन मंडियों में हर साल बड़ी मात्रा में अनाज की खरीदी-बिक्री होती है। कई मंडियों में एक से तीन लाख टन तक अनाज पहुंचता है। भोपाल संभाग की 16 मंडियों को A ग्रेड में जगह मिली है। नई ग्रेडिंग से इन मंडियों में सुविधाओं के विस्तार की उम्मीद बढ़ी है।
किसानों के लिए बढ़ेंगी सुविधाएं
ग्रेडिंग के बाद बेहतर प्रदर्शन करने वाली मंडियों में किसानों के लिए अतिरिक्त सुविधाएं विकसित की जाएंगी। मंडियों में ज्यादा शेड, कैंटीन, बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और अतिरिक्त तौल कांटे लगाए जा सकते हैं। इससे बारिश और धूप से अनाज को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और किसानों को तौल के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
A और B ग्रेड की मंडियां बढ़ीं
पिछली ग्रेडिंग में प्रदेश में 39 मंडियां A ग्रेड में थीं, जो अब बढ़कर 47 हो गई हैं। इसी तरह B ग्रेड की मंडियां 42 से बढ़कर 63 हो गई हैं। यानी A ग्रेड में 8 और B ग्रेड में 21 मंडियों की बढ़ोतरी हुई है।
तीन साल की आय से तय हुआ ग्रेड
सरकार हर 10 साल में कृषि मंडियों की ग्रेडिंग करती है। इस बार वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की औसत आय और अनाज की आवक को आधार बनाया गया है। आय का आकलन मंडी शुल्क और लाइसेंस शुल्क से हुई वास्तविक कमाई के आधार पर किया गया है।
प्रदेश में 557 मंडी संस्थाएं
मध्य प्रदेश में वर्तमान में 259 कृषि उपज मंडी समितियां और 298 उपमंडियां हैं। इनमें 81 मंडियां C और 68 मंडियां D वर्ग में हैं। इन कम ग्रेड वाली मंडियों में भी सुधार की कवायद शुरू की गई है। नया वर्गीकरण बुधवार से प्रभावी कर दिया गया है।
प्रशासनिक व्यवस्था होगी मजबूत
नई ग्रेडिंग का असर सिर्फ सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा। मंडी के ग्रेड के अनुसार अधिकारी-कर्मचारियों के सेटअप में बदलाव किया जाएगा। वित्तीय अधिकार बढ़ाने और मंडी समितियों की कार्यक्षमता में विस्तार की भी योजना है।
किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
ग्रेडिंग से मंडी समितियां किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम होंगी। जरूरी लाइसेंसों का विस्तार और व्यवस्था को अधिक सुव्यवस्थित किया जाएगा। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से किसानों का समय बचेगा और मंडियों में अनाज की खरीदी-बिक्री की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।