मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश पर मंत्री समूह की किसान प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय में बैठक शुरू हो चुकी है। बैठक में कृषि मंत्री इंदल सिंह कंसाना,सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री कृष्णा गौर शामिल हैं। मंत्रालय वल्लभ भवन में मुख्यमंत्री के निर्देश पर मंत्री समूह मूंग ख़रीदी पर विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से चर्चा करके समस्या हल निकालेंगे।
सहमति का रास्ता निकालने का प्रयास किया जा रहा
भोपाल में मूंग खरीदी और किसानों की अन्य मांगों को लेकर जारी आंदोलन के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मंत्रालय वल्लभ भवन में मंत्री समूह और विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक शुरू हो गई है। इस बैठक में किसानों की समस्याओं पर विस्तार से चर्चा कर सहमति का रास्ता निकालने का प्रयास किया जा रहा है।
3 मंत्री कर रहे बातचीत
बैठक में प्रदेश के कृषि मंत्री इंदल सिंह कंसाना, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग और पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री कृष्णा गौर शामिल हैं। तीनों मंत्री किसान संगठनों के प्रतिनिधियों से सीधे संवाद कर उनकी मांगों और शिकायतों को सुन रहे हैं। सरकार का उद्देश्य आंदोलन को शांतिपूर्ण तरीके से समाप्त करते हुए किसानों की समस्याओं का व्यावहारिक समाधान निकालना है।
किसानों से सीधी बातचीत के निर्देश दिए
मूंग खरीदी, ई-टोकन व्यवस्था को समाप्त करने, समर्थन मूल्य पर समय पर खरीदी और भुगतान सहित कई मुद्दों को लेकर किसान पिछले कई दिनों से राजधानी भोपाल में प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान किसानों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी जताते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की मांग की है। बढ़ते आंदोलन को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्री समूह का गठन कर किसानों से सीधी बातचीत के निर्देश दिए थे।
सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर रहा
सरकार का कहना है कि किसानों के हित सर्वोच्च प्राथमिकता हैं और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाएगा। बैठक में किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी मांगों और सुझावों को विस्तार से रख रहे हैं, जबकि मंत्री समूह भी सभी बिंदुओं पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
आंदोलन समाप्त होने की संभावना
अब इस बैठक के नतीजों पर किसानों और प्रदेशभर के कृषि समुदाय की नजरें टिकी हुई हैं। यदि बैठक में सहमति बनती है तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना है, वहीं समाधान नहीं निकलने की स्थिति में किसान आगे की रणनीति का ऐलान कर सकते हैं। सरकार और किसानों के बीच चल रही यह वार्ता प्रदेश की कृषि व्यवस्था और लाखों किसानों के हितों के लिए अहम मानी जा रही है।