रिटायर्ड एआरएम साइबर ठगी का शिकार

वीडियो कॉल पर पुलिस-CBI अफसर बने ठग, रिटायर्ड ARM से ऐंठे 14 लाख

लखनऊ में एक रिटायर्ड एआरएम को साइबर ठगों ने डराकर 14 लाख रुपए लूट लिए। ठगों ने खुद को पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताया और धमकी दी।

By : शिवम् पांडेय
वीडियो कॉल पर पुलिस-CBI अफसर बने ठग, रिटायर्ड ARM से ऐंठे 14 लाख

रिटायर्ड एआरएम साइबर ठगी का शिकार

लखनऊ के राजाजीपुरम में रहने वाले परिवहन विभाग के रिटायर्ड एआरएम बैकुण्ठ नाथ मिश्रा साइबर ठगों के जाल में फंस गए। ठगों ने खुद को पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताया। इसके बाद उन्हें डिजिटल अरेस्ट कर करीब 14 लाख रुपए ट्रांसफर करा लिए। ठगों ने बैकुण्ठ नाथ को बताया कि उनके आधार कार्ड से मुंबई में एक मोबाइल सिम जारी हुई है। इसी सिम के जरिए बैंक खाता खोला गया और उसमें मनी लॉन्ड्रिंग की गई। इसके बाद उन्हें पुलवामा आतंकी घटना से जोड़कर जेल भेजने की धमकी दी गई। डर के कारण उन्होंने अपनी एफडी और पोस्ट ऑफिस की एमआईएस तक तुड़वा दी। ठगों के बताए दो बैंक खातों में कुल 14 लाख रुपए ट्रांसफर कर दिए।

पुलिस की वर्दी में वीडियो कॉल

बैकुण्ठ नाथ के मुताबिक, 1 सितंबर को करीब 11 बजे उनके मोबाइल पर कॉल आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम सुरेश महरोत्रा बताया। उसने कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके मुंबई के तिलक नगर में एक मोबाइल सिम ली गई है। आरोपी ने बताया कि इसी सिम से केनरा बैंक की बांद्रा शाखा में खाता खोला गया। खाते के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग होने का आरोप भी लगाया। इसके बाद उन्हें संदीप नागर नाम के व्यक्ति से बात करने को कहा गया। संदीप ने वीडियो कॉल की। वह पुलिस की वर्दी में था। उसके पीछे महाराष्ट्र पुलिस के लोगो वाला बोर्ड भी दिखाई दे रहा था। उसने दावा किया कि बैकुण्ठ नाथ के खाते में पाकिस्तान से 2.50 करोड़ रुपए आए हैं। उसने यह भी कहा कि उन्हें 25 लाख रुपए कमीशन मिला है।

पुलवामा केस का डर दिखाया

इसके बाद ठगों ने बैकुण्ठ नाथ को पुलवामा आतंकी घटना से जोड़कर डराया। उन्होंने कहा कि एक आतंकी के पकड़े जाने के बाद जांच में उनका नाम सामने आया है। ठगों ने कहा कि उनके बैंक खातों की जांच होगी। दोषी पाए जाने पर जेल भेजने की बात कही गई। इसके बाद एक और व्यक्ति से बात कराई गई। उसे डीजीपी विजय खन्ना बताया गया। आरोपियों ने कहा कि उनके नाम का गलत इस्तेमाल हुआ हो सकता है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट से उनके खिलाफ आरोपपत्र और गिरफ्तारी वारंट जारी हो चुका है। ठगों ने इसके फर्जी दस्तावेज भी WhatsApp पर भेजे। साथ ही धमकी दी कि अगर उन्होंने यह बात परिवार को बताई तो उनके बच्चों का भविष्य खराब कर दिया जाएगा।

सीबीआई डायरेक्टर बनकर बात की

इसके बाद ठगों ने एक व्यक्ति से वीडियो कॉल कराई। उसे सीबीआई डायरेक्टर राजेश मिश्रा बताया गया। उसने जांच में सहयोग करने का भरोसा दिया और जेल से बचाने की बात कही। इसके बाद 9 लाख रुपए एक आईसीआईसीआई बैंक खाते में भेजने के लिए कहा गया। बैकुण्ठ नाथ के मुताबिक, ठग उन्हें लगातार वीडियो कॉल पर रखते थे। 3 सितंबर को वह राजाजीपुरम स्थित सेंट्रल बैंक की शाखा पहुंचे। उन्होंने अपनी एफडी तुड़वाई और बैंक खाते से 9 लाख रुपए RTGS के जरिए बताए गए खाते में भेज दिए।

पुलिस ने शुरू की जांच

इसके बाद उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं। उन्होंने मामले की शिकायत पुलिस से की। साइबर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इंस्पेक्टर साइबर थाना आलोक राव के मुताबिक, ट्रांजेक्शन की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किन खातों में गई और इसके पीछे कौन लोग हैं। पुलिस लोगों से लगातार अपील करती रही है कि कोई भी अधिकारी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट या पैसे ट्रांसफर करने का आदेश नहीं देता। ऐसे कॉल आने पर घबराने के बजाय तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।

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