फैजल खान उर्फ खान सर को मिली जमानत,दोनों बॉडीगार्ड भी बेल पर रिहा
चर्चित कोचिंग विवाद मामले में पटना के खान सर और उनके दोनों बॉडीगार्ड्स को कोर्ट ने बड़ी राहत देते हुए तीनों को अग्रिम जमानत दे दी है. ये मामला जून की शुरुआत में हुई फायरिंग की घटना से जुड़ा है, जब कुछ उपद्रवियों ने कथित तौर पर खान के कोचिंग इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ की थी. घटना के दौरान उनके सुरक्षा गार्डों पर फायरिंग करने का आरोप है. फैसल खान के साथ-साथ उनके दोनों निजी सुरक्षाकर्मियों (बॉडीगार्ड) को भी इस पूरे विवादित प्रकरण में सह-आरोपी बनाया गया था.
इस चर्चित विवाद के बाद गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए आरोपियों द्वारा कानूनी राहत के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया गया था. सिविल कोर्ट ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलों को सुनने के बाद बुधवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था और आज यानी सोमवार को अपना फैसला सुनाते हुए खान सर समेत तीनों लोगों की अग्रिम जमानत दे दी है.
खान सर के वकील ने कहा
अदालत की पिछली सुनवाई के बाद खान के वकील अरविंद कुमार मौआर ने समाचार एजेंसी को बताया, 'जिला जज छुट्टी पर थे, इसलिए आज आदेश नहीं सुनाया जा सका. इसे सोमवार तक टाल दिया गया है.' उन्होंने कहा कि आदेश सुनाए जाने तक टीचर को सख़्त कार्रवाई से मिली अंतरिम सुरक्षा लागू रहेगी.
खान सर की अग्रिम जमानत याचिका के अलावा अदालत ने बुधवार को उनके दो सुरक्षा गार्डों की नियमित जमानत याचिका और कोचिंग इंस्टीट्यूट के तीन अन्य कर्मचारियों की अग्रिम जमानत याचिका पर भी अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था उन्होंने आगे कहा, ‘पुलिस ने बहुत अच्छा इन्वेस्टिगेट किया है, इसमें जो सच्चाई थी, उसको उसमें डायरी में लिखा गया है। कुछ आर्गुमेंट्स वगैरह भी रहा, विरोधी पक्ष की ओर से विरोध तो बहुत किया गया, लेकिन जो लॉ है, उसके मुताबिक जज ने उसको कंसिडर किया है। उसके बाद जमानत मंजूर की गई है।’
10 जुलाई को कोर्ट ने फैसला रखा था सुरक्षित
इससे पहले कोर्ट की ओर से सुनवाई के दौरान फैजल खान उर्फ खान सर की क्रिमिनल हिस्ट्री की मांगी गई थी। फिर 10 जुलाई को कोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से कहा गया था कि पुलिस की ओर से केस फाइल फाइनल कर दिया गया था। इसीलिए इस केस का जिक्र नहीं किया गया था।रौशन आनंद पक्ष की ओर से सत्या झा ने खान की जमानत का विरोध किया था। उन्होंने कोर्ट को बताया था कि फैजल खान की ओर से क्रिमिनल हिस्ट्री छिपाई गई है। इसके बाद कोर्ट ने कल सुनवाई के बाद क्रिमिनल इंसीडेंस सबमिट करने के लिए कहा था।
दोनों बॉडीगार्ड्स के हथियार वेरिफिकेशन में हुए खुलासे
बता दें कि पटना पुलिस की जांच में फैजल खान (खान सर) के दोनों बॉडीगार्ड्स के हथियारों के वेरिफिकेशन के दौरान अहम जानकारियां सामने आई थीं। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जिस हथियार से गोली चलवाई गई थी, वह तालेबर सिंह (34), निवासी कासगंज (उत्तर प्रदेश) का है, लेकिन उसके नाम पर जारी हथियार लाइसेंस का परमिट पूरे भारत के लिए मान्य नहीं पाया गया।
आरोप है कि उतर प्रदेश से बिहार में हथियार लेकर आने, हथियार लेकर सुरक्षा ड्यूटी करने के लिए तालेबर सिंह के पास वैध अनुमति नहीं थी। फिर भी वह बिहार में बॉडीगार्ड की नौकरी कर रहा था। पुलिस ने फायरिंग में इस्तेमाल किए गए हथियारों और उनके लाइसेंस की जांच के बाद कई बिंदुओं को अपडेटेड केस डायरी में शामिल किया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक
तालेबर सिंह गैर कानूनी तरीके से हथियार लेकर बिहार में बॉडीगार्ड की नौकरी कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि बिहार में हथियार के साथ नौकरी करने की जानकारी स्थानीय प्रशासन, आर्म्स मजिस्ट्रेट या संबंधित थाने को नहीं दी गई थी, जो कानूनन अपराध है।
खान ने हथियार का वेरिफिकेशन नहीं कराया
खान सर ने तालेबर सिंह को बॉडी गार्ड के तौर पर हायर किया, उन्होंने भी कभी इसका पुलिस वेरिफिकेशन नहीं कराया। अपने साथ अवैध हथियार लेकर घूमते रहे फायरिंग भी करवा दी, जबकि उन्हें एक रिस्पॉन्सिबल व्यक्ति होने के चलते कानूनी प्रक्रिया को पूरी करनी चाहिए थी।
दूसरे बॉडीगार्ड के हथियार पर भी जांच
दूसरे बॉडीगार्ड प्रदीप कुमार का हथियार मैनपुरी यूपी का है। इस हथियार के वेरिफिकेशन के दौरान पता चला है कि ऑल ओवर इंडिया परमिट तो है, लेकिन ये प्रदीप के पिता की हत्या के बाद सेल्फ डिफेंस के लिए प्रोवाइड किया गया था, जिसका गलत इस्तेमाल इसने सिक्योरिटी एजेंसी के साथ मिलकर निजी फायदे के लिए किया। यह आर्म्स लाइसेंस के मानकों के अनुरूप नहीं है। पुलिस ने इन तमाम बिंदुओं का जिक्र अपनी अपडेटेड केस डायरी में भी किया है।