मॉब लिंचिंग केस में उम्रकैद का फैसला सुनाने वाली जज को मिली धमकियां, हाईकोर्ट सख्त

न्यायाधीश को धमकियां, हाईकोर्ट सख्त

मॉब लिंचिंग केस में उम्रकैद का फैसला सुनाने वाली जज को मिली धमकियां, हाईकोर्ट सख्त

मध्यप्रदेश में मॉब लिंचिंग के दोषियों को सजा देने वाले न्यायाधीश को धमकियां मिलने पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया और न्यायाधीश की सुरक्षा कड़ी की।

मॉब लिंचिंग केस में उम्रकैद का फैसला सुनाने वाली जज को मिली धमकियां हाईकोर्ट सख्त

मध्यप्रदेश के नर्मदापुरम में चर्चित मॉब लिंचिंग मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने वाली जिला एवं सत्र न्यायाधीश को सोशल मीडिया पर धमकियां मिलने का मामला सामने आया है। इस गंभीर घटनाक्रम पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य में न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा और कानून का पालन कराने वालों को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए पूछा कि संबंधित न्यायाधीश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने अदालत को बताया कि प्रभावित न्यायाधीश को तत्काल सशस्त्र सुरक्षा उपलब्ध करा दी गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर न्यायाधीश के खिलाफ की गई आपत्तिजनक और धमकी भरी पोस्ट हटाने की कानूनी प्रक्रिया भी तेज़ी से चल रही है। हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जुलाई को निर्धारित की है।

अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए

यह मामला अगस्त 2022 में हुई एक चर्चित मॉब लिंचिंग घटना से जुड़ा है। महाराष्ट्र के अमरावती से कुछ लोग ट्रक में मवेशी लेकर जा रहे थे। इसी दौरान नर्मदापुरम जिले के सिवनी मालवा क्षेत्र में भीड़ ने ट्रक को रोक लिया और उसमें सवार लोगों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में नाजिर अहमद की मौत हो गई थी, जबकि अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।

आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए

इस मामले में जिला एवं सत्र न्यायाधीश तबस्सुम खान की अदालत ने 12 जून को फैसला सुनाते हुए 14 आरोपियों को दोषी करार दिया और सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। फैसले के बाद से सोशल मीडिया पर न्यायाधीश को लगातार धमकियां मिलने लगीं। इसी को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले में हस्तक्षेप किया और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए।

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