प्रवर्तन निदेशालय (ED) के अधिकारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जवाब दाखिल करने में देरी और अतिरिक्त समय मांगने पर अदालत ने हेमंत सोरेन की ओर से जुर्माना लगाया और जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को निर्धारित की है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद 31 जनवरी 2024 को दर्ज उस एफआईआर से जुड़ा है, जो हेमंत सोरेन की ओर से रांची के एससी-एसटी थाने में ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज कराई गई थी। एफआईआर में तत्कालीन ईडी अधिकारी कपिल राज समेत अन्य अधिकारियों पर आरोप लगाए गए थे। सोरेन ने आरोप लगाया था कि ईडी अधिकारियों ने उन्हें निशाना बनाया और कथित तौर पर उनके साथ उत्पीड़न किया। एफआईआर में एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराएं लगाई गई थीं।
इसके बाद ईडी अधिकारियों ने झारखंड हाई कोर्ट का रुख किया और एफआईआर तथा उसके आधार पर शुरू हुई कार्रवाई को रद्द करने की मांग की। अधिकारियों की ओर से दायर याचिका में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामले को चुनौती दी गई है।
जवाब दाखिल करने के लिए मांगा गया था और समय
गुरुवार की सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए और समय मांगा गया। अदालत ने देरी पर नाराजगी जताते हुए प्रतिवादी पक्ष पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया। साथ ही अदालत ने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले को अगली सुनवाई के लिए 2 नवंबर को सूचीबद्ध कर दिया।
रिपोर्टों के मुताबिक, यह पहली बार नहीं है जब जवाब दाखिल करने में देरी को लेकर अदालत ने सख्ती दिखाई है। अप्रैल 2026 में भी अधिक समय मांगने पर अदालत ने जुर्माना लगाया था।
अंतिम फैसला अभी बाकी
हाई कोर्ट में चल रही यह कार्यवाही फिलहाल ईडी अधिकारियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका से संबंधित है। 10 हजार रुपये का जुर्माना जवाब दाखिल करने में हुई देरी से जुड़ा है और इससे मामले के अंतिम कानूनी परिणाम का निर्धारण नहीं होता। एफआईआर रद्द होगी या नहीं, इस पर अदालत का अंतिम फैसला अभी बाकी है।
अब सभी की नजरें 2 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई पर हैं, जब अदालत के समक्ष संबंधित पक्षों के जवाब और दलीलें आगे की कार्यवाही का आधार बनेंगी।