झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की हाल के दिनों में सीमित सार्वजनिक मौजूदगी और प्रशासनिक गतिविधियों को लेकर सियासी चर्चाएं तेज हैं। मुख्यमंत्री की सार्वजनिक उपस्थिति बीते कुछ दिनों में मुख्य रूप से शोक और संवेदना से जुड़े कार्यक्रमों तक सीमित दिखाई दी है। इसी बीच 25 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक भी स्थगित हुई, जिसके बाद राज्य की राजनीति में मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं और सरकार के फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे।
शोक की घटनाओं के बीच सार्वजनिक कार्यक्रम
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद हेमंत सोरेन दो बार गिरिडीह पहुंचे और अंतिम संस्कार में शामिल होने के साथ परिजनों से मुलाकात की। इसके बाद मंत्री दीपिका पांडेय सिंह की बेटी समेत चार लोगों की सड़क हादसे में मौत के बाद मुख्यमंत्री ने शोक व्यक्त किया। 24 सितंबर को जमशेदपुर के मरीन ड्राइव पर हुए हादसे में चार लोगों की मौत हुई थी।
इससे पहले 19 सितंबर को सोरेन पूर्व मंत्री और भाजपा नेता विमला प्रधान के निधन पर उनके आवास पहुंचे थे। इन घटनाओं के बीच 25 सितंबर को प्रस्तावित कैबिनेट बैठक भी स्थगित कर दी गई।
बड़गाईं जमीन मामले में अदालत की कार्यवाही
मुख्यमंत्री की व्यस्तताओं का एक अहम हिस्सा बड़गाईं जमीन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की कानूनी प्रक्रिया भी है। 24 सितंबर को रांची की विशेष PMLA अदालत में हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। उनके वकील ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों की समीक्षा के लिए समय मांगा, जिसके बाद अदालत ने आरोप तय करने की कार्यवाही 30 सितंबर तक टाल दी। मामले में 17 आरोपियों में से 16 के खिलाफ आरोप तय किए जा चुके हैं।
इस मामले में लगभग 8.83 एकड़ जमीन से जुड़े कथित अवैध अधिग्रहण और मनी लॉन्ड्रिंग की जांच चल रही है। मुख्यमंत्री इस मामले में आरोपित हैं और अदालत की कार्यवाही जारी है।
मां के इलाज को लेकर भी व्यस्तता
हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन की तबीयत खराब होने की वजह से भी मुख्यमंत्री की निजी व्यस्तताएं बढ़ी हैं। उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अस्पताल ले जाने और चिकित्सकीय परामर्श से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी सामने आती रही है। ऐसे में मुख्यमंत्री की सार्वजनिक गतिविधियों पर निजी पारिवारिक जिम्मेदारियों का भी असर पड़ा है।
सरकार के कामकाज पर क्या असर?
मुख्यमंत्री की सार्वजनिक मौजूदगी कम होने के बावजूद सत्तारूढ़ गठबंधन और प्रशासनिक स्तर पर यह कहा गया है कि सरकारी कामकाज नियमित रूप से जारी है। विभागीय कार्य और जरूरी प्रशासनिक प्रक्रियाएं चल रही हैं। दूसरी ओर, विपक्ष मुख्यमंत्री की सीमित सार्वजनिक सक्रियता और कुछ बड़े फैसलों में दिखाई दे रही देरी को लेकर सवाल उठा रहा है।
हालांकि, मुख्यमंत्री की हालिया गतिविधियों को केवल प्रशासनिक निष्क्रियता के रूप में देखना उचित नहीं होगा। सितंबर में वे ‘करम’ पर्व पर सार्वजनिक संदेश भी जारी कर चुके हैं और राज्य के मुद्दों पर सरकार की गतिविधियां जारी रही हैं।
फिलहाल बड़गाईं जमीन मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 30 सितंबर है। इसके साथ ही यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में मुख्यमंत्री की सार्वजनिक और प्रशासनिक गतिविधियां किस तरह आगे बढ़ती हैं।