इंदौर में करीब दो महीने पहले गर्भपात में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का बड़ा जखीरा पकड़े जाने के बाद औषधि विभाग ने सप्लाई नेटवर्क की जांच तेज कर दी है। जब्त दस्तावेजों और बिलों की पड़ताल के बाद मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश की कई फर्में विभाग के रडार पर आई हैं। अब इन फर्मों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
बिना डॉक्टर की पर्ची दवा बेचने का आरोप
27 जुलाई को ड्रग डिपार्टमेंट और संयोगितागंज पुलिस ने एमवाय हॉस्पिटल के सामने स्थित कार्तिक केमिस्ट पर कार्रवाई की थी। जांच के दौरान मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल कॉम्बिनेशन वाली किट बिना डॉक्टर के पर्चे के बेचने की बात सामने आई। नियमों के उल्लंघन के चलते मेडिकल स्टोर को सील कर दिया गया।
क्वालिटी फार्मा तक पहुंची जांच
कार्तिक केमिस्ट से जब्त बिल और दस्तावेजों के आधार पर विभाग ने दवाओं की सप्लाई के स्रोत तलाशे। इसी पड़ताल में टीम 25 सितंबर को धार कोठी स्थित क्वालिटी फर्म पहुंची। यहां लाइसेंस मौजूद था, लेकिन रिकॉर्ड में दर्ज गोदाम के स्थान को लेकर अंतर सामने आया। टीम ने यहां से करीब 10 हजार किट जब्त कीं।
मोदी ब्रदर्स से भी जब्त हुईं किट
क्वालिटी फार्मा के रिकॉर्ड से लसूड़िया मोरी स्थित मोदी ब्रदर्स का नाम सामने आया। इसके बाद 26 सितंबर को टीम ने यहां दबिश दी। कार्रवाई के दौरान करीब 10 हजार और गर्भपात किट जब्त की गईं। यहां बड़ी संख्या में सेफ टी किट भी मिलीं। अधिकारियों के मुताबिक, यहां स्टॉक लाइसेंस में दर्ज स्थान पर ही मिला।
20 हजार से ज्यादा किट जब्त
क्वालिटी फार्मा और मोदी ब्रदर्स से मिलाकर 20 हजार से ज्यादा किट जब्त होने की बात सामने आई है। अब विभाग खरीद-बिक्री के बिल, स्टॉक रजिस्टर और सप्लाई से जुड़े दस्तावेजों का मिलान कर रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाएं किन मेडिकल स्टोर्स या अन्य खरीदारों तक पहुंचीं।
तीन राज्यों की फर्में जांच के दायरे में
मोदी ब्रदर्स से मिले दस्तावेजों की जांच में मध्य प्रदेश के अलावा अन्य राज्यों की फर्मों के नाम सामने आए हैं। विभाग अब इन फर्मों के लाइसेंस, बिलिंग और खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड का सत्यापन कर रहा है। अधिकारियों की पड़ताल सप्लाई चेन की अलग-अलग कड़ियों को जोड़ने पर केंद्रित है।
दो कंपनियों के उत्पाद मिले
जांच में मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल कॉम्बिनेशन वाली अलग-अलग कंपनियों की दवाएं मिलीं। क्वालिटी फार्मा में ग्लोबल इनिशिएटिव कंपनी का उत्पाद मिला, जिसकी बिलिंग दूसरे राज्य से हुई थी। वहीं मोदी ब्रदर्स में जननी कंपनी का उत्पाद मिला। दोनों मामलों में खरीद और लेन-देन के दस्तावेजों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है।
रिकॉर्ड में गड़बड़ी की भी जांच
औषधि विभाग यह भी जांच रहा है कि कहीं दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड में हेराफेरी तो नहीं की गई। इसके लिए दस्तावेजों में दर्ज मात्रा का वास्तविक स्टॉक से मिलान किया जाएगा। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि रिकॉर्ड में दिखाई गई बिक्री और वास्तविक सप्लाई के बीच कोई अंतर है या नहीं।
Schedule H दवाओं की बिक्री पर नियम
मिफेप्रिस्टोन और मिसोप्रोस्टोल का संयोजन मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी में इस्तेमाल होता है। दी गई जानकारी के अनुसार, इन्हें सामान्य OTC दवा की तरह बिना चिकित्सकीय पर्चे के बेचना अनुमति-प्राप्त नहीं है। Schedule H दवाओं की बिक्री Registered Medical Practitioner के प्रिस्क्रिप्शन पर किए जाने का प्रावधान है। अब विभाग यह भी जांच रहा है कि इन दवाओं की सप्लाई और बिक्री निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं।