हिमाचल प्रदेश विधानसभा के प्रश्नकाल में गुरुवार को मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के परिवार की पुश्तैनी जमीन से जुड़ा मामला गरमा गया। कांगड़ा जिले के रक्कड़-परागपुर में जल जीवन मिशन के तहत जल शक्ति विभाग के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा विधायक आशीष शर्मा के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में उनके परिवार को सूचना दिए बिना पुश्तैनी जमीन पर पानी का टैंक बना दिया गया था।
मुख्यमंत्री के मुताबिक, परिवार जमीन बेचने के पक्ष में नहीं था। जमीन पत्थर वाली होने के कारण वहां क्रशर लगाने की संभावना थी, लेकिन टैंक बनने के बाद उसके 500 मीटर के दायरे में खनन की अनुमति नहीं मिल सकती थी। उनके बड़े भाई ने भी जमीन सरकार को देने से इनकार कर दिया था। मामला नादौन कोर्ट तक पहुंचा, जहां स्टे भी मिला था।
अधिकारियों की नौकरी का सवाल आया तो भाई को मनाया
सुक्खू ने कहा कि जब मामला अधिकारियों की नौकरी तक पहुंच गया, तो उन्होंने स्वयं अपने भाई को जमीन सरकार को देने के लिए राजी किया, ताकि क्षेत्र के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि रक्कड़-परागपुर में जमीन की कीमत करीब 50 लाख रुपये प्रति कनाल है, लेकिन उनके परिवार की 10 कनाल जमीन सरकार ने महज 18 लाख रुपये में खरीदी। उनके अनुसार, यह भुगतान पूर्व भाजपा सरकार के समय किया गया था और जमीन का अधिग्रहण भू-अधिग्रहण कमेटी की सिफारिश के आधार पर हुआ था।
सुक्खू ने यह भी कहा कि इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर चुका है। साथ ही उन्होंने विधानसभा में सवाल उठाने की मंशा पर भी सवाल खड़े किए और कहा कि यह मुद्दा पहले भी सदन में उठाया जा चुका है।
आशीष शर्मा ने 2012 की खरीद का उठाया मुद्दा
भाजपा विधायक आशीष शर्मा ने कहा कि वर्ष 2012 में जमीन 2,700 रुपये में खरीदी गई थी, जबकि बाद में इसी जमीन को विभाग ने 18 लाख रुपये में खरीदा। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने जवाब देते हुए कहा कि इस मामले से संबंधित सवाल पहले भी सदन में लगाया जा चुका है। उन्होंने दोहराया कि जमीन पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में खरीदी गई थी।
जयराम ठाकुर बोले- खरीद की दर और विभाग का नाम बताएं
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार बार-बार पूर्व सरकार का जिक्र कर रही है, जबकि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। उन्होंने मांग की कि सरकार स्पष्ट करे कि जमीन किस दर पर और किस विभाग ने खरीदी।
जयराम ने कहा कि यदि जमीन मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नाम पर थी और सरकार को इसकी जानकारी होती, तो ऐसी जमीन खरीदने का फैसला नहीं किया जाता। उन्होंने सरकार से पूरी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की, ताकि किसी तरह के मिलीभगत के आरोप की गुंजाइश न रहे। भाजपा विधायक बिक्रम ठाकुर ने भी मामले में सरकार से स्पष्टीकरण मांगा।
विधानसभा अध्यक्ष ने रिकॉर्ड देखने की बात कही
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि वह रिकॉर्ड देखकर बताएंगे कि यह सवाल पहले सदन में पूछा गया था या नहीं। इस पर आशीष शर्मा ने कहा कि पहले पूछा गया सवाल अलग था और मौजूदा सवाल अलग है। उन्होंने कहा कि विधायक के तौर पर सवाल पूछना उनका अधिकार है।