हरिद्वार कुंभ में सख्त निर्णय

हरिद्वार कुंभ में देवी-देवताओं का रूप धरकर नृत्य करने पर प्रतिबंध की तैयारी, अखाड़ा परिषद - सनातन का उपहास बर्दाश्त नहीं

हरिद्वार कुंभ में अखाड़ा परिषद ने धार्मिक स्वरूपों की मर्यादा बनाए रखने के लिए सख्त निर्णय लिया है। धार्मिक भावनाओं का सम्मान करने की अपील की गई।

By : दिव्या मिस्त्री
हरिद्वार कुंभ में देवी-देवताओं का रूप धरकर नृत्य करने पर प्रतिबंध की तैयारी, अखाड़ा परिषद - सनातन का उपहास बर्दाश्त नहीं

हरिद्वार कुंभ में धार्मिक स्वरूपों की मर्यादा बनाए रखने को लेकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने सख्त रुख अपनाया है। परिषद ने देवी-देवताओं का रूप धारण कर नृत्य करने जैसे कृत्यों को सनातन धर्म का उपहास बताया है। परिषद का कहना है कि ऐसे कार्यों पर रोक लगाने के लिए कानूनी प्रावधानों को लेकर मंथन किया जाएगा। आगामी नवरात्रों से ही ऐसे कृत्यों पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी की जा रही है। परिषद ने स्पष्ट किया कि धार्मिक भावनाओं और सनातन परंपराओं का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

मां दुर्गा और मां काली का रूप धारण करने वालों पर कार्रवाई की चेतावनी

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी ने कहा कि सनातन धर्म का उपहास उड़ाने वाले कृत्यों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने विशेष रूप से मां दुर्गा और मां काली का रूप धारण कर नृत्य करने वालों पर सख्त कार्रवाई की बात कही। उनके मुताबिक, परिषद की ओर से पहले भी ऐसे कार्यों को लेकर चेतावनी दी जा चुकी है। इसके बावजूद कुछ लोग देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर नृत्य कर रहे हैं। परिषद ने इस तरह के प्रदर्शन को अशोभनीय बताते हुए धार्मिक मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया है।

अखाड़ा परिषद करेगी कानूनी प्रावधानों पर मंथन

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी के अनुसार, देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर नृत्य करने जैसे मामलों पर कानूनी रोक लगाने को लेकर कुंभ के दौरान विचार-विमर्श किया जाएगा। परिषद का मानना है कि ऐसे कृत्यों से धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं और सनातन धर्म के प्रति गलत संदेश जा सकता है। परिषद ने आगामी नवरात्रों के दौरान ऐसे कार्यक्रमों पर विशेष नजर रखने का निर्णय लिया है। हालांकि, प्रस्तावित प्रतिबंधों का स्वरूप और कानूनी प्रक्रिया अभी स्पष्ट नहीं है।

धार्मिक परंपराओं की मर्यादा बनाए रखने पर जोर

अखाड़ा परिषद ने कहा कि सनातन धर्म और उसकी परंपराएं भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। परिषद के मुताबिक, देवी-देवताओं का स्वरूप धारण कर नृत्य करना धार्मिक मर्यादाओं के प्रति अनादर दर्शा सकता है। परिषद का आरोप है कि कुछ लोग चेतावनियों के बावजूद ऐसे कार्यों को जारी रख रहे हैं। इसी वजह से परिषद ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए सख्त कदम उठाने की बात कही है। परिषद का कहना है कि धार्मिक आयोजनों में परंपराओं और आस्थाओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

नवरात्रों में आयोजकों से सहयोग की अपील

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने नवरात्रों के दौरान धार्मिक कार्यक्रम आयोजित करने वाले संगठनों और आयोजकों से सहयोग की अपील की है। परिषद ने कहा कि सभी आयोजकों को धार्मिक स्वरूपों की मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए और ऐसे कृत्यों को रोकने में सहयोग करना चाहिए। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रस्तावित निर्णयों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि हरिद्वार कुंभ के दौरान इस मुद्दे पर क्या निर्णय लिया जाता है और धार्मिक आयोजनों में मर्यादा बनाए रखने के लिए कौन से कदम उठाए जाते हैं।

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