छत्तीसगढ़ में नक्सली महिलाओं का परिवर्तन

छत्तीसगढ़ में नौ आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने रैंपवॉक में दिखाया जलवा

छत्तीसगढ़ में नक्सली महिलाओं ने पारंपरिक हथकरघा वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया, जिससे उनके पुनर्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए गए।

By : सोनिया रायकवार
छत्तीसगढ़ में नौ आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने रैंपवॉक में दिखाया जलवा

छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील पुनर्वास नीति और सकारात्मक पहलों के अब धरातल पर सुखद और प्रेरक परिणाम सामने आ रहे हैं। राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में शुक्रवार को आयोजित राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन में भावुक क्षण देखने को मिला।यहाँ नक्सली महिलाओं ने पारंपरिक हथकरघा वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया।

नौ आत्मसमर्पित नक्सली महिला

सुकमा जिले की नौ आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने पारंपरिक हथकरघा वस्त्र पहनकर रैंप वॉक किया। कभी जिन हाथों में हिंसा और आतंक की प्रतीक बंदूकें हुआ करती थीं, आज वही महिलाएं राज्य के पारंपरिक कोसा सिल्क और हैंडलूम परिधानों में आत्मविश्वास से मुस्कुराती नजर आईं। यह दृश्य बदलते बस्तर और प्रशासन के सफल पुनर्वास प्रयासों की एक जीवंत तस्वीर बनकर उभरा है।

मुख्यमंत्री साय ने किया आत्मीय संवाद

इस गरिमामय अवसर पर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इन महिलाओं के अदम्य साहस और मुख्यधारा में लौटने के फैसले की दिल से सराहना की। मुख्यमंत्री ने उनसे आत्मीय संवाद करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीर्वाद दिया और उनका मनोबल बढ़ाया। पहली बार राजधानी रायपुर पहुंचीं इन महिलाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास और अविस्मरणीय रहा। प्रदेश सरकार द्वारा लगातार संचालित किए जा रहे कौशल विकास कार्यक्रमों के माध्यम से इन महिलाओं को समाज में न केवल एक सम्मानजनक स्थान मिल रहा है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बनाया जा रहा है।

संकोच को बदला अटूट आत्मविश्वास में

मुंबई से आए पेशेवर विशेषज्ञों ने लगातार सात दिनों तक इन महिलाओं को रैंप वॉक, वेशभूषा, ग्रूमिंग और माइक पर बेझिझक अपनी बात रखने का विशेष प्रशिक्षण दिया था। समर्पण से लेकर मंच की सुर्खियों तक का यह सफर केवल एक साधारण फैशन शो नहीं था, बल्कि यह उस मानवीय संवेदना का जीवंत प्रमाण था जो भटक चुके युवाओं को मुख्यधारा में लाकर उनके जीवन को गरिमापूर्ण बना रही है। जो कदम कभी बस्तर के सुदूर जंगलों में आतंक की राह पर चलने को मजबूर थे, आज वही कदम आत्मविश्वास के साथ मंच पर चलकर छत्तीसगढ़ की समृद्ध हथकरघा विरासत का गौरव पूरे देश के सामने प्रस्तुत कर रहे हैं।

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