उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यसभा की 10 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भाजपा की रणनीति सामने आई है। पार्टी सामाजिक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ज्यादातर नए चेहरों को मौका देने की तैयारी में है। हालांकि, कुछ मौजूदा सांसदों को दोबारा उम्मीदवार बनाया जा सकता है। उत्तराखंड की एक राज्यसभा सीट पर भी पार्टी नए चेहरे को उतारने की योजना बना रही है।
आठ सांसदों में से पांच को बदलने की चर्चा
पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मौजूदा आठ सांसदों में से कम से कम पांच को इस बार दोबारा मौका नहीं देने की योजना है। इनमें दिनेश शर्मा पहले ही उपराज्यपाल बनने के बाद राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे चुके हैं। भाजपा इस बार भी पिछली बार के समान सामाजिक संतुलन बनाए रखने पर जोर दे सकती है, लेकिन उम्मीदवारों के चेहरे बदलने की संभावना है।
ओबीसी प्रतिनिधित्व बढ़ाने की रणनीति
वर्तमान में भाजपा के आठ राज्यसभा सांसदों में चार अगड़ी जाति, दो ओबीसी, एक अल्पसंख्यक और एक एससी वर्ग से हैं। सूत्रों के अनुसार, इस बार भी जातीय समीकरण लगभग इसी तरह बनाए रखा जा सकता है। हालांकि, ओबीसी वर्ग में पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए प्रतिनिधित्व दो से बढ़ाकर तीन किए जाने की संभावना जताई जा रही है। राजपूत बिरादरी के दोनों मौजूदा चेहरों को बदलने और ब्राह्मण समाज से नए चेहरे को मौका देने की चर्चा है।
तीन सांसदों को मिल सकता है दोबारा मौका
भाजपा की संभावित रणनीति के तहत एससी वर्ग से पूर्व डीजीपी बृज लाल, केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और ओबीसी वर्ग से बीएल वर्मा को दोबारा राज्यसभा भेजे जाने की संभावना बताई जा रही है। पुरी के अंतरराष्ट्रीय अनुभव और राजनीतिक भूमिका को देखते हुए उनका नाम चर्चा में है। वहीं, बृज लाल और बीएल वर्मा के जरिए पार्टी संबंधित सामाजिक समूहों में अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखने का प्रयास कर सकती है।
दस सीटों में भाजपा को आठ, सपा को दो सीटें
विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों में से आठ भाजपा और दो समाजवादी पार्टी के खाते में जाने का अनुमान बताया गया है। एक सीट जीतने के लिए 37 विधायकों के वोट जरूरी होंगे। हालांकि, अंतिम परिणाम चुनाव के दौरान वोटिंग और राजनीतिक समीकरणों पर निर्भर करेंगे।
आठवीं सीट के लिए अतिरिक्त वोटों की चुनौती
राजग के संख्याबल में निर्दलीय विधायकों, राजा भैया के समर्थक विधायकों और सुभासपा से जुड़े विधायकों के रुख का असर पड़ सकता है। पार्टी को आठवीं सीट जीतने के लिए अतिरिक्त वोटों की जरूरत पड़ने की बात कही जा रही है। ऐसे में सहयोगी दलों और निर्दलीय विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण हो सकता है।
उत्तराखंड में कद्दावर नेता पर नजर
उत्तराखंड में वर्तमान राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल पूरा होने के बाद भाजपा नए चेहरे को मौका देने की तैयारी में बताई जा रही है। विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी किसी प्रभावशाली नेता को उम्मीदवार बना सकती है। हालांकि, उम्मीदवारों के नाम और अंतिम जातीय समीकरण पर आधिकारिक घोषणा का इंतजार रहेगा।