भोपाल में हजारों अतिथि शिक्षकों ने किया जोरदार प्रदर्शन

भोपाल में अतिथि शिक्षकों का प्रदर्शन

भोपाल में हजारों अतिथि शिक्षकों ने किया जोरदार प्रदर्शन

भोपाल में अतिथि शिक्षकों ने सरकार की वादाखिलाफी के खिलाफ प्रदर्शन किया, नियमितीकरण और अन्य मांगों की पूर्ति की मांग की।

भोपाल में हजारों अतिथि शिक्षकों ने किया जोरदार प्रदर्शन

राजधानी में अतिथि शिक्षकों ने किया प्रदर्शन |

राजधानी भोपाल में अतिथि शिक्षक संयुक्त मोर्चा के बैनर तले प्रदेशभर से आए हजारों अतिथि शिक्षकों ने भोपाल में सरकार की वादाखिलाफी के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। आंदोलन के दौरान शिक्षकों ने एकजुट होकर अपनी लंबित मांगों को पूरा करने की मांग उठाई और चेतावनी दी कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

शिक्षकों में नाराजगी

इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष सुनील सिंह परिहार ने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने अतिथि शिक्षकों के लिए गुरुजियों की तर्ज पर नीति लागू करने, सीधी भर्ती में बोनस अंक देने और वार्षिक अनुबंध के माध्यम से भविष्य सुरक्षित करने का वादा किया था, लेकिन अब तक इन पर कोई अमल नहीं हुआ है। इसको लेकर शिक्षकों में नाराजगी देखने को मिली।

शिक्षकों के बेरोजगार होने का खतरा

वरिष्ठ पदाधिकारी रामचंद्र नागर और प्रदेश अध्यक्ष के.सी. पवार ने आरोप लगाया कि सरकार वार्षिक अनुबंध के अपने वादे से पीछे हट रही है। इसके चलते 30 अप्रैल के बाद करीब सवा लाख अतिथि शिक्षकों के बेरोजगार होने का खतरा है। 

प्रदेश सचिव रविकांत गुप्ता ने ई-अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी दिक्कतों को तत्काल दूर करने की मांग की।

बी.एम. खान ने भर्ती प्रक्रिया की विसंगतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि 2008 से कार्यरत अतिथि शिक्षकों को उनके अनुभव का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।

ये हैं मुख्य मांगें

- नियमितीकरण के लिए विशेष विभागीय पात्रता परीक्षा आयोजित कर कम से कम 30% पद अतिथि शिक्षकों के लिए आरक्षित किए जाएं।

- शिक्षक भर्ती में 50% पद अतिथि शिक्षकों के लिए तय हों, हर वर्ष 4 बोनस अंक (अधिकतम 20) दिए जाएं और पात्रता अंकों में 10% छूट मिले।

- स्कोर कार्ड में हर वर्ष 10 अंक (अधिकतम 100) जोड़े जाएं और 50 दिन कार्य पूर्ण होने पर अनुभव अंक मिलें, 2011 संविदा परीक्षा के अंक भी जोड़े जाएं।

- 12 माह का वार्षिक अनुबंध लागू किया जाए और कार्यमुक्त होने पर समायोजन किया जाए।

- बीमा, पीएफ, स्वास्थ्य सुविधाएं और 13 आकस्मिक व 3 ऐच्छिक अवकाश दिए जाएं।

- ई-अटेंडेंस प्रणाली में सुधार कर काटे गए मानदेय का तुरंत भुगतान किया जाए।

- तकनीकी समस्या की स्थिति में ऑफलाइन उपस्थिति मान्य की जाए।

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