बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के बीच उत्तराखंड में देवस्थानम बोर्ड का विवाद फिर सियासी और धार्मिक बहस के केंद्र में आ चुका है। पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जहां मंदिरों के बेहतर प्रबंधन के लिए देवस्थानम बोर्ड की जरूरत दोहराई, वहीं केदारनाथ धाम के तीर्थ पुरोहित संतोष त्रिवेदी ने इसका कड़ा विरोध करते हुए दोबारा बोर्ड लागू होने पर गांव से लेकर विधानसभा तक आंदोलन की चेतावनी दी।
‘चोरी का मामला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण’
पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा - बद्रीनाथ धाम में कथित चढ़ावा चोरी का मामला बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिस पर सभी पक्षों को भरोसा हो। अगर कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। उन्होंने कहा उनका रुख नहीं बदला है। उनका मानना है कि चारधाम समेत प्रमुख मंदिरों के बेहतर प्रबंधन के लिए देवस्थानम बोर्ड जैसी व्यवस्था बेहद जरूरी है।
वहीं तीर्थ पुरोहित त्रिवेदी ने क्या कहा केदारनाथ धाम केवल मंदिर नहीं, बल्कि सनातन परंपराओं और तीर्थ पुरोहितों की विरासत का प्रतीक है। इन पर किसी भी तरह का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्या है देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड?
उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड एक वैधानिक बोर्ड था, जिसे प्रदेश के प्रमुख मंदिरों के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन और विकास के लिए बनाया गया था। इसके दायरे में बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम समेत कुल 51 मंदिर लाए गए थे। देवस्थानम बोर्ड का उद्देश्य मंदिरों के प्रबंधन को एकीकृत और व्यवस्थित करना बताया गया था।