उत्तरकाशी में राख की होली, विश्वनाथ मंदिर में महादेव के रंग में रंगे भक्त

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उत्तरकाशी में राख की होली, विश्वनाथ मंदिर में महादेव के रंग में रंगे भक्त

उत्तरकाशी में राख की होली विश्वनाथ मंदिर में महादेव के रंग में रंगे भक्त

Ash Holi Uttarkashi: उत्तरकाशी में रंगभरी होली के पहले एक अनूठी होली भी खेली जाती है। जिसमें भगवान शिव के भक्त एक दूसरे को भस्म लगाकर नाचते है। उत्तरकाशी में स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में सोमवार को भस्म की होली खेली गई। भस्म की होली का आयोजन करीब 10 सालों से किया जा रहा है। 

राख की होली

उत्तरकाशी में फाल्गुन पूर्णिमा पर स्थित काशी-विश्वनाथ मंदिर प्रांगण में हवन कुंड की राख से भक्त रंगे नजर आए। भस्म की इस अनोखी होली में भगवान शिव की महाआरती की गई। इसके बाद सैकड़ों श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को पवित्र भस्म लगाकर शुभकामनाएं दीं। ढोल-दमाऊ की थाप और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष के बीच होल्यार पारंपरिक गीतों पर लोग थिरकते दिखे।

[caption id="attachment_138108" align="alignnone" width="1159"]विश्वनाथ मंदिर में महादेव के रंग में रंगे भक्त विश्वनाथ मंदिर में महादेव के रंग में रंगे भक्त[/caption]

Ash Holi Uttarkashi: महादेव का अभिषेक

मंदिर में साल भर होने वाले यज्ञों की भस्म को स्थानीय निवासी एक दूसरे पर लगाने के साथ ही प्रसाद के रूप में घर भी ले जाते हैं। होली के दौरान स्थानीय लोग रासो तांदी नृत्य पर जमकर थिरके। ब्रह्ममुहूर्त में भगवान शिव का अभिषेक किया गया। इसके बाद मंदिर में विधि-विधान से हवन संपन्न हुआ। हवन कुंड से निकली भस्म को पुजारियों ने पहले इसे भगवान को अर्पित किया। महाआरती के बाद श्रद्धालुओं ने इसी भस्म को प्रसाद के रूप में ग्रहण कर एक-दूसरे को लगाया।

[caption id="attachment_138109" align="alignnone" width="1159"]काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों ने खेली होली काशी विश्वनाथ मंदिर में भक्तों ने खेली होली[/caption]

आध्यात्म और लोक संस्कृति का संगम

भस्म की होली के दौरान स्थानीय वाद्य यंत्रों की थाप पर होल्यारों ने पारंपरिक गीत गाए और जमकर नृत्य किया। मंदिर में आध्यात्म और लोक संस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था के लिए आवश्यक इंतजाम किए।

भस्म की होली केवल परंपरा नहीं, बल्कि दर्शन है। राख यह संदेश देती है कि जीवन क्षणभंगुर है और अंत में सब कुछ भस्म में ही परिवर्तित हो जाता है। ऐसे में हर पल को सार्थक बनाना और अहंकार त्यागकर जीवन जीना ही मूल संदेश है।

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