बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा, इंटरनेशनल क्राइम्स ट्र...

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बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा, इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल का बड़ा फैसला

Shaikh Haseena death sentence: बांग्लादेश की सियासत में बड़ा भूचाल तब आया जब ढाका की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को दो गंभीर आरोपों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हसीना हत्या के लिए उकसाने और हत्या करवाने के आदेश जारी करने की जिम्मेदार हैं। इसी मामले में देश के पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को 12 लोगों की हत्या का दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई गई है।

हसीना की संपत्ती जब्त

ट्रिब्यूनल ने तीसरे आरोपी, पूर्व पुलिस महानिदेशक (IGP) अब्दुल्ला अल-ममून को पांच साल कैद की सजा दी है। ममून सरकारी गवाह बन चुके हैं, इसलिए उन्हें हल्की सजा दी गई। अदालत ने अपने आदेश में शेख हसीना और असदुज्जमां खान की सभी चल-अचल संपत्तियां जब्त करने का निर्देश भी दिया है। [caption id="attachment_117551" align="alignnone" width="660"]शेख हसीना और असदुज्जमां खान और IGP शेख हसीना और असदुज्जमां खान और IGP[/caption]

Shaikh Haseena death sentence: भारत में रह रही हैं हसीना

फैसले के अनुसार, दोनों प्रमुख आरोपी शेख हसीना और असदुज्जमां पिछले 15 महीनों से बांग्लादेश से फरार हैं और भारत में रह रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन के दौरान हुई मौतों और हिंसा के लिए हसीना को मास्टरमाइंड माना गया था। इसी आधार पर उनके खिलाफ मुकदमा चलाया गया।

हसीना ने ही की थी कोर्ट की स्थापना

यह फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल की स्थापना 2010 में स्वयं शेख हसीना की सरकार ने की थी। इस ट्रिब्यूनल का उद्देश्य 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान हुए युद्ध अपराधों, नरसंहार और मानवाधिकार उल्लंघन की जांच और दोषियों को सजा देना था। अब इसी ट्रिब्यूनल ने पूर्व प्रधानमंत्री को ही दोषी करार दिया है। [caption id="attachment_117552" align="alignnone" width="580"]इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल[/caption]

Shaikh Haseena death sentence: भारत में मां सुरक्षित 

ट्रिब्यूनल के फैसले के बाद शेख हसीना और असदुज्जमां खान को 30 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट के अपील डिवीजन में अपील दाखिल करने का अधिकार दिया गया है। नियम के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट को इस अपील पर 60 दिनों के भीतर फैसला सुनाना अनिवार्य होगा। हसीना के बेटे सजीब वाजेद ने अल जजीरा से बातचीत में कहा था कि उन्हें पहले से उम्मीद थी कि अदालत उनकी मां को मौत की सजा सुनाएगी। उन्होंने दावा किया कि भारत में उनकी मां पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारतीय सुरक्षा एजेंसियां उन्हें पूर्ण सुरक्षा प्रदान कर रही हैं। Read More: मक्का से मदीना जा रही बस टैंकर से टकराई

निर्णय पक्षपाती और गलत

Shaikh Haseena death sentence: फैसले के बाद शेख हसीना ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह निर्णय पक्षपाती, गलत और राजनीति से प्रेरित है। उनका कहना है कि यह ट्रिब्यूनल वर्तमान में एक गैर-निर्वाचित सरकार के नियंत्रण में है, जिसके पास जनता का कोई जनादेश नहीं है। हसीना ने कहा कि यह पूरा मामला वास्तविक घटनाओं की निष्पक्ष जांच नहीं, बल्कि अवामी लीग और उसके नेताओं को टारगेट करने की राजनीति है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूरे केस का उद्देश्य विपक्ष को कमजोर करना और सत्ता पर पकड़ बनाए रखना है।

बांग्लादेश में हिंसा और हाईवे जाम: शेख हसीना पर फैसले से पहले राजधानी ढाका में सेना तैनात

bangladesh violence hasina verdict: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध मामले में 17 नवंबर को फैसला सुनाए जाने से पहले राजधानी ढाका और अन्य जिलों में हिंसा और आगजनी की घटनाएं बढ़ गई हैं

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पूर्व पीएम हसीना के समर्थकों ने हाल के दिनों में अपने प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। उनका मुख्य उद्देश्य पूर्व पीएम के खिलाफ आरोपों को खारिज कराना और फरवरी 2026 में चुनाव की तारीख का ऐलान करवाना है। पूरी खबर...

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