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Vadodara chemical tanker: वडोदरा: गंभीर ब्रिज पर फंसे केमिकल टैंकर को 27 दिन बाद सुरक्षित निकाला गया, पार-तापी प्रोजेक्ट को लेकर फिर भड़का विवाद

vadodara chemical tanker वडोदरा गंभीर ब्रिज पर फंसे केमिकल टैंकर को 27 दिन बाद सुरक्षित निकाला गया पार-तापी प्रोजेक्ट को लेकर फिर भड़का विवाद

Vadodara chemical tanker: वडोदरा के गंभीर ब्रिज पर पिछले 27 दिनों से फंसे केमिकल टैंकर को आखिरकार आधुनिक तकनीक की मदद से सुरक्षित निकाल लिया गया। यह अभियान अत्यंत चुनौतीपूर्ण था क्योंकि टैंकर के पहिए ब्रिज से नीचे झूल रहे थे और हल्का सा संतुलन बिगड़ने पर बड़ा हादसा हो सकता था।

[caption id="attachment_98707" align="alignnone" width="284"]Vadodara chemical tanker Vadodara chemical tanker[/caption]

Vadodara chemical tanker: तकनीकी टीम की मुस्तैदी का उदाहरण पेश किया

इस जटिल ऑपरेशन को मरीन इमरजेंसी रिस्पांस सेंटर की विशेषज्ञ टीम ने अंजाम दिया। उन्होंने हाई-टेक उपकरणों जैसे बेलून और हाइड्रॉलिक जैक का इस्तेमाल कर टैंकर को धीरे-धीरे स्थिर किया और सावधानीपूर्वक निकालकर हादसे को टाल दिया। 27 दिनों तक चले इस ऑपरेशन ने प्रशासन और तकनीकी टीम की मुस्तैदी का उदाहरण पेश किया।

Vadodara chemical tanker: अब आदिवासी संगठनों के निशाने पर

दूसरी ओर, गुजरात में पार तापी नर्मदा रिवर लिंक प्रोजेक्ट को लेकर एक बार फिर से राजनीतिक तनाव उभर आया है। यह प्रोजेक्ट, जिसे पहले भी जनविरोध और पर्यावरणीय चिंताओं का सामना करना पड़ा है, अब आदिवासी संगठनों के निशाने पर है।

विस्थापन और जल संकट की स्थिति पैदा होगी

आदिवासी संघर्ष समिति ने इस परियोजना के विरोध में 14 अगस्त को वलसाड जिले के धर्मपुर में एक बड़ी जन आक्रोश रैली आयोजित करने का ऐलान किया है। समिति का आरोप है कि इस परियोजना से आदिवासी इलाकों में विस्थापन और जल संकट की स्थिति पैदा होगी।

Vadodara chemical tanker: पर्यावरण के लिए घातक बता रहे

समिति के नेताओं का कहना है कि सरकार आदिवासी समुदाय की सहमति के बिना उनके जल, जंगल और जमीन पर अतिक्रमण कर रही है। वे पार तापी नर्मदा लिंक को जनविरोधी और पर्यावरण के लिए घातक बता रहे हैं।

सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जरूरी

इस परियोजना के चलते राजनीतिक दलों के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। विपक्षी पार्टियां इसे सरकार की असंवेदनशीलता बता रही हैं, जबकि सरकार का कहना है कि यह प्रोजेक्ट राज्य के जल प्रबंधन और सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए जरूरी है।

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