MonsoonBreak2025: छत्तीसगढ़ में थमा मानसून, रायपुर-दुर्ग में कम बारिश

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MonsoonBreak2025: छत्तीसगढ़ में थमा मानसून, रायपुर-दुर्ग में कम बारिश

monsoonbreak2025 छत्तीसगढ़ में थमा मानसून रायपुर-दुर्ग में कम बारिश

बिलासपुर-सरगुजा में भारी वर्षा की संभावना, 13 जिलों में यलो अलर्ट छत्तीसगढ़ में बीते एक सप्ताह से जारी तेज बारिश के बाद अब मानसून की रफ्तार में ब्रेक लग गया है। शुक्रवार को प्रदेशभर में औसतन केवल 12.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले पांच दिनों तक राज्य के रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभागों में बारिश की तीव्रता कम रहेगी।

वहीं दूसरी ओर, बिलासपुर और सरगुजा संभाग में मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक मध्यम से भारी बारिश की संभावना जताई है। यह सूचना किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राहत की खबर हो सकती है, जो मानसून पर खेती-किसानी के लिए निर्भर रहते हैं।

कहां कितनी बारिश हुई?

मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जून से अब तक छत्तीसगढ़ में औसतन 362.1 मिमी वर्षा हो चुकी है।

सबसे अधिक बारिश: रायगढ़ में 518.3 मिमी

सबसे कम बारिश: बेमेतरा में मात्र 174.9 मिमी इस असंतुलित वर्षा वितरण से कई इलाकों में फसल की स्थिति और जलस्रोतों पर असर पड़ सकता है।

13 जिलों में यलो अलर्ट, बिजली गिरने का खतरा

शनिवार को मौसम विभाग ने रायपुर, बलौदा बाजार, जांजगीर-चांपा, कोरिया, बलरामपुर सहित 13 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया है। यह चेतावनी विशेष रूप से आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के लिए है।बिजली गिरने की घटनाएं ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल जनहानि और संपत्ति नुकसान का कारण बनती हैं। इससे बचाव को लेकर जागरूकता जरूरी है।

मानसून की अवधि लंबी हो सकती है

इस वर्ष मानसून ने केरल में अपनी सामान्य तिथि 1 जून से 8 दिन पहले यानी 24 मई को दस्तक दी। यदि मानसून 15 अक्टूबर तक रहता है, तो इस बार मानसून की कुल अवधि 145 दिन तक हो सकती है।हालांकि, यदि इस बीच मानसून में ब्रेक या ठहराव की स्थिति न बने, तो यह जलाशयों, खेती और भू-जल स्तर के लिए लाभकारी होगा।

क्यों गिरती है आकाशीय बिजली?

आसमान में विपरीत चार्ज वाले बादल आपस में टकराते हैं। इस टकराव से घर्षण पैदा होता है जिससे विद्युत ऊर्जा (बिजली) बनती है। जब यह बिजली धरती की ओर आती है, तो वह किसी अच्छे कंडक्टर (जैसे पेड़, टॉवर या इंसान) की तलाश करती है। यदि उस समय कोई व्यक्ति खुले में हो, तो बिजली सीधे उसके शरीर में प्रवाहित हो सकती है, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है।

आकाशीय बिजली से जुड़े जरूरी तथ्य

इसका तापमान सूरज की सतह से अधिक होता है।

यह बिजली मिलीसेकंड से भी कम समय के लिए धरती पर टिकती है। यह आमतौर पर दोपहर या शाम के वक्त गिरती है। शरीर के सिर, गर्दन और कंधे इसके प्रभाव क्षेत्र में सबसे पहले आते हैं। यह 12.5 करोड़ वॉट से अधिक ऊर्जा लेकर गिरती है।

आम मिथ और सच्चाई

मिथक सच्चाई
बिजली एक ही जगह दो बार नहीं गिरती गलत – एक ही स्थान पर कई बार गिर सकती है
रबर, फोम या टायर बिजली से बचाते हैं गलत – कोई गारंटी नहीं
नाव चला रहे हों तो बाहर आ जाएं गलत – नाव के अंदर झुके रहना सुरक्षित
लंबी चीजें बिजली से बचाती हैं गलत – वे ज्यादा आकर्षित करती हैं
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