बाथरूम में पैदा हुआ बच्चा, मां ने 9वीं मंजिल से नीचे फेंका!

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बाथरूम में पैदा हुआ बच्चा, मां ने 9वीं मंजिल से नीचे फेंका!

बाथरूम में पैदा हुआ बच्चा मां ने 9वीं मंजिल से नीचे फेंका

Newborn thrown from 9th floor Ahmedabad: अहमदाबाद के गांधीनगर सत्र न्यायालय ने 25 साल की महिला को दोषी ठहराते हुए नवजात शिशु के जन्म की जानकारी छिपाने और बच्चे के शव को गुप्त रूप से ठिकाने लगाने के आरोप में दो साल की सजा सुनाई। अदालत ने महिला को IPC की धारा 318 के तहत दोषी ठहराया, जबकि उसे हत्या के आरोप से बरी कर दिया। अदालत ने यह भी पाया कि यह साबित नहीं हुआ कि बच्चे को जन्म के बाद मार दिया गया था। दोषी पर 15,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

[caption id="attachment_100178" align="alignnone" width="475"]बाथरूम में पैदा हुआ बच्चा, मां ने 9वीं मंजिल से नीचे फेंका! बाथरूम में पैदा हुआ बच्चा, मां ने 9वीं मंजिल से नीचे फेंका![/caption]

मामला क्या था?

19 अप्रैल 2023 को अहमदाबाद के चांदखेड़ा क्षेत्र में स्काईवॉक सोसाइटी के पार्किंग क्षेत्र में एक नवजात शिशु (लड़के) का शव मिला था। शव को 10 मंजिला इमारत से फेंके जाने की आशंका जताई गई थी। सोसाइटी के अध्यक्ष ने इस घटना की शिकायत चांदखेड़ा पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच शुरू की और पता चला कि शव को नौवीं मंजिल पर रहने वाली एक 25 वर्षीय महिला ने अपने बेडरूम के बाथरूम की खिड़की से फेंका था। महिला पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 302 (हत्या) और धारा 318 (जन्म छिपाने और शव को गुप्त रूप से ठिकाने लगाने) के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जांच में क्या सामने आया?

पुलिस ने जांच के दौरान पाया कि महिला ने अपने बेडरूम के बाथरूम में बच्चे को जन्म दिया था। जन्म को छिपाने के लिए उसने नवजात के शव को बाथरूम की खिड़की से फेंक दिया। जांच में 21 गवाहों के बयान और चिकित्सा व वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत किए गए, जिनसे यह पुष्टि हुई कि महिला ही नवजात की मां थी। माता-पिता की पहचान भी स्थापित की गई। हालांकि, यह साबित नहीं हो सका कि बच्चे को जन्म के बाद मार दिया गया था। अतिरिक्त लोक अभियोजक पी डी व्यास के अनुसार, अभियोजन पक्ष हत्या का इरादा साबित करने में विफल रहा। [caption id="attachment_100179" align="alignnone" width="451"]गांधीनगर सत्र न्यायालय ने सुनाया फैसला गांधीनगर सत्र न्यायालय[/caption]

Newborn thrown from 9th floor Ahmedabad: अदालत का फैसला

गांधीनगर सत्र न्यायालय के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पी एम उनादकट ने 8 अगस्त 2025 को फैसला सुनाया। अदालत ने सबूतों का मूल्यांकन करने के बाद महिला को धारा 318 के तहत दोषी ठहराया, जिसमें जन्म छिपाने और शव को गुप्त रूप से ठिकाने लगाने की सजा का प्रावधान है। अधिकतम दो साल की सजा और 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। हत्या (धारा 302) के आरोप से बरी करते हुए अदालत ने कहा कि यह साबित नहीं हुआ कि बच्चे को जानबूझकर मारा गया। महिला अप्रैल 2023 से जेल में थी।

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