वैश्विक बाजारों में अशांति
एनालिसिस

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड बाज़ार की उथल-पुथल ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया

ब्रेंट क्रूड लगभग $94 प्रति बैरल के करीब, वैश्विक बॉन्ड बाज़ार में उथल-पुथल, और सोना तीन महीने के उच्चतम स्तर पर उछला।

By : शुभ लाभ
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और बॉन्ड बाज़ार की उथल-पुथल ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया

 

मार्केट रिपोर्ट: कच्चा तेल $94 के करीब पहुंचने से सेंसेक्स, निफ्टी का उतार-चढ़ाव भरा सप्ताह गिरावट के साथ बंद; वैश्विक बॉन्ड बाज़ार की उथल-पुथल से वॉल स्ट्रीट, एशिया हिले; सोना 3-महीने के उच्च स्तर पर उछला

इस सप्ताह वैश्विक बाज़ारों ने वाकई एक अशांत दौर देखा, जिसका केंद्र शेयर नहीं बल्कि बॉन्ड रहे — दुनिया भर में लंबी अवधि के ट्रेजरी में तीव्र बिकवाली, $40 ट्रिलियन के अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज़ के आंकड़े तक पहुंचने, और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों ने मुंबई से न्यूयॉर्क तक निवेशकों को सतर्क बनाए रखा। भारतीय बेंचमार्क शुक्रवार की रिकवरी की कोशिश के बावजूद सप्ताह भर में गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि वॉल स्ट्रीट और अधिकांश एशियाई बाज़ार भी सप्ताह के अंत में रिकवरी के बावजूद लाल निशान में समाप्त हुए। सोना, स्वाभाविक रूप से, इस सप्ताह के चंद स्पष्ट विजेताओं में से एक रहा।

भारतीय बाज़ार: कच्चे तेल से महंगाई की चिंताओं के बीच सेंसेक्स, निफ्टी का अस्थिर सप्ताह गिरावट के साथ बंद

बीएसई सेंसेक्स शुक्रवार के सत्र में लगभग सपाट, केवल 3.11 अंक की बढ़त के साथ 77540.83 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50, 20.15 अंक या 0.08% चढ़कर 24,252.00 पर बंद हुआ, क्योंकि मेटल और रियल्टी शेयरों में खरीदारी ने आईटी, एफएमसीजी, ऑटो, मीडिया और फार्मा शेयरों में बिकवाली की भरपाई कर दी। सप्ताह भर में, निफ्टी करीब 0.5% और सेंसेक्स लगभग 0.6% गिरा, भले ही दोनों सूचकांकों ने गुरुवार को तीव्र रिकवरी दर्ज की थी — निफ्टी ने सात-सत्रों की गिरावट की लकीर तोड़ी और सेंसेक्स ने चार-सत्रों की गिरावट को समाप्त किया — इससे पहले कि शुक्रवार को वे फिर से दिशा तलाशते नज़र आएं।

इसका मुख्य कारण कच्चा तेल रहा: ब्रेंट लगभग $94 प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा था और अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़ी आपूर्ति व्यवधान की बढ़ती चिंताओं के बीच लगातार दूसरे साप्ताहिक बढ़त की ओर बढ़ रहा था, जो भारत के लिए एक चेतावनी संकेत है क्योंकि देश आयातित कच्चे तेल पर भारी निर्भर है। ऊर्जा लागत बढ़ने से आयात बिल बढ़ने, रुपये पर दबाव, महंगाई जोखिम बढ़ने और ईंधन-प्रधान व्यवसायों के मार्जिन पर दबाव की आशंका है। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में नए सिरे से आए दबाव ने भी सप्ताह भर सतर्क माहौल को बढ़ावा दिया। मारुति सुज़ुकी, ट्रेंट, इंटरग्लोब एविएशन, इंफोसिस और एचसीएल टेक्नोलॉजीज़ सप्ताह के सबसे बड़े पिछड़ने वालों में शामिल रहे, जबकि कोटक महिंद्रा बैंक, आयशर मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा, इटरनल, सन फार्मा और पावर ग्रिड को खरीदारी का समर्थन मिला।

एशियाई बाज़ार: बॉन्ड बिकवाली से जापान, कोरिया प्रभावित; चीन, हांगकांग अधिक मज़बूत बने रहे

इस सप्ताह एशियाई बाज़ार स्पष्ट रूप से विभाजित रहे, काफी हद तक वॉल स्ट्रीट जैसी ही रेखा के साथ: बढ़ती बॉन्ड यील्ड के प्रति एक्सपोज़र। जापान का निक्केई 225 शुक्रवार को 0.30% गिरकर 66,016.36 पर बंद हुआ — जो लगभग 4% की तीव्र साप्ताहिक गिरावट है — क्योंकि जापान के 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड तीन दशकों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई, जिससे ब्याज दर-संवेदनशील टेक्नोलॉजी और रियल एस्टेट शेयरों को झटका लगा, जिन्होंने पहले सूचकांक की तेज़ी को बल दिया था। दक्षिण कोरिया का कोस्पी शुक्रवार को 0.88% चढ़कर 6,912.95 पर पहुंचा, लेकिन फिर भी सप्ताह भर में करीब 1% की गिरावट के साथ बंद हुआ, यह एक अस्थिर दौर के बाद हुआ जिसमें स्मॉल-कैप कोसडैक पर संक्षिप्त रूप से सर्किट ब्रेकर लागू हुआ।

इसके विपरीत, हांगकांग का हैंग सेंग क्षेत्र के चंद उजले स्थानों में से एक रहा, जो शुक्रवार को करीब 1.2% चढ़कर लगभग 26,009 पर बंद हुआ — जो करीब 3.5% की मज़बूत साप्ताहिक बढ़त है — जिसकी अगुवाई हेल्थकेयर और टेक्नोलॉजी शेयरों ने की और जिसे मुख्य भूमि चीन से आ रहे बेहतर मांग संकेतों का सहारा मिला। चीन का शंघाई कंपोज़िट सप्ताह भर में लगभग सपाट स्तर पर 3,905.20 पर बंद हुआ, क्योंकि पीपल्स बैंक ऑफ चाइना ने अपनी बेंचमार्क ऋण दरों को स्थिर बनाए रखा।

अमेरिकी बाज़ार: वॉल स्ट्रीट शुक्रवार को उछला लेकिन बॉन्ड बाज़ार की उथल-पुथल के बीच सप्ताह भर में गिरावट के साथ बंद

अमेरिकी शेयर बाज़ारों ने एक असाधारण रूप से अस्थिर सप्ताह को शुक्रवार की ठोस तेज़ी के साथ समाप्त किया, जिसमें एसएंडपी 500, 0.43% चढ़कर 7,674.37 पर बंद हुआ, नैस्डैक कंपोज़िट 0.43% उछलकर 26,180.46 पर पहुंचा, और डाओ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज गोल्डमैन सैक्स और मर्क में मज़बूत बढ़त के दम पर करीब 1% उछलकर लगभग 53,280 पर बंद हुआ। शुक्रवार की उछाल के बावजूद, तीनों प्रमुख सूचकांक सप्ताह भर में गिरावट के साथ ही समाप्त हुए, क्योंकि लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी में लगातार बिकवाली — जिसने 30-वर्षीय यील्ड को लगभग दो दशकों में नहीं देखे गए स्तरों तक पहुंचा दिया — ने बार-बार जोखिम उठाने की क्षमता को हिलाकर रख दिया, भले ही ट्रेजरी विभाग ने लंबी अवधि के सरकारी कर्ज़ की अपनी बायबैक को कम से कम दोगुना करने की असाधारण योजना की घोषणा की।

यह उथल-पुथल इस सप्ताह $40 ट्रिलियन के पार पहुंचे अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज़ और राष्ट्रपति ट्रंप की बढ़ती तीखी बयानबाज़ी की पृष्ठभूमि में हुई, जिन्होंने ईरान के साथ व्यापार करने वाले किसी भी देश के लिए "भारी आर्थिक परिणाम" की धमकी दी, जबकि ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट तेहरान को आर्थिक रूप से अलग-थलग करने की योजना के विवरण का खुलासा करने वाले हैं। इस उथल-पुथल के बीच, बिटकॉइन उछलकर लगभग $77,000 तक पहुंच गया, जो दो वर्षों में इसका सबसे बेहतर सप्ताह रहा, जबकि सोना तीन महीने के उच्चतम स्तर लगभग $4,569 प्रति औंस तक उछला, जो इसकी लगातार पांचवीं साप्ताहिक बढ़त है, और अकेले सप्ताह भर में करीब 5% चढ़ गया।

कच्चा तेल: खाड़ी तनाव पर ब्रेंट $94 के करीब, लगातार दूसरी साप्ताहिक बढ़त

इस सप्ताह तेल की कीमतों ने अपनी बढ़त जारी रखी, जिसमें ब्रेंट क्रूड करीब $93-94 प्रति बैरल — लगभग एक महीने के उच्चतम स्तर — पर कारोबार कर रहा था, क्योंकि खाड़ी में एक कूटनीतिक गतिरोध और जारी अमेरिका-ईरान संघर्ष ने आपूर्ति संबंधी चिंताओं को ऊंचा बनाए रखा। डब्ल्यूटीआई क्रूड भी इसी राह पर चलते हुए करीब $86-87 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। यह ब्रेंट की लगातार दूसरी साप्ताहिक बढ़त रही, जिसने तेल-आयातक अर्थव्यवस्थाओं, भारत सहित, में $90 प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई कच्चे तेल की कीमतों के महंगाई प्रभाव को लेकर चिंताएं और बढ़ा दीं।

आज भारत में सोने और चांदी के भाव

इस सप्ताह भारत में सोने ने अपनी तेज़ रैली जारी रखी, क्योंकि वैश्विक बॉन्ड बाज़ार की उथल-पुथल और सुलगते मध्य-पूर्व तनाव के बीच निवेशकों ने सुरक्षित निवेश संपत्तियों की ओर रुख किया, जिससे सोना नए उच्च स्तरों की ओर बढ़ा। आज की स्थिति के अनुसार:

- 24 कैरेट सोना: लगभग ₹15,928-16,048 प्रति ग्राम (करीब ₹1,59,280-1,60,480 प्रति 10 ग्राम)
- 22 कैरेट सोना: लगभग ₹14,601-14,710 प्रति ग्राम
- 18 कैरेट सोना: लगभग ₹12,036 प्रति ग्राम
- चांदी: लगभग ₹2,55,000 प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई

सोना पिछले महज़ तीन सप्ताह में करीब 10% चढ़ चुका है, जो एक वैश्विक तेज़ी के अनुरूप है, जिसने अंतरराष्ट्रीय हाज़िर कीमतों को जून के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। स्थानीय करों और मेकिंग चार्ज के कारण कीमतें शहर-दर-शहर भिन्न होती हैं, जिनमें दिल्ली और हैदराबाद आमतौर पर मामूली प्रीमियम पर रहते हैं। इन आंकड़ों में जीएसटी और अन्य लागू शुल्क शामिल नहीं हैं — कीमतें जिस तेज़ी से बदल रही हैं, उसे देखते हुए प्रकाशन से पहले लाइव दर की जांच करना उचित रहेगा।

रुपया और मुद्रा बाज़ार

इस सप्ताह भारतीय रुपया दबाव में रहा, जिसमें अमेरिकी डॉलर शुक्रवार तक बढ़कर लगभग ₹95.7-95.75 पर पहुंच गया, जो हाल के महीनों के अपने सबसे कमज़ोर स्तरों के करीब है, क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और वैश्विक बॉन्ड बाज़ार की बिकवाली ने सेंटीमेंट पर दबाव डाला।

अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले रुपया लगभग निम्नलिखित स्तरों पर रहा:

- 1 अमेरिकी डॉलर (USD) ≈ ₹95.7
- 1 यूरो (EUR) ≈ ₹110.1
- 1 ब्रिटिश पाउंड (GBP) ≈ ₹129.2
- 100 जापानी येन (JPY) ≈ ₹60.6

आगे की दिशा

वैश्विक बॉन्ड बाज़ारों के अभी भी स्थिरता की तलाश में रहने और अनसुलझे मध्य-पूर्व तनाव पर कच्चे तेल की कीमतों के चढ़ते रहने के साथ, निवेशकों को अगले सप्ताह के लिए वाकई एक अनिश्चित पृष्ठभूमि का सामना करना पड़ रहा है। बाज़ार ईरान के खिलाफ ट्रंप प्रशासन के आर्थिक दबाव अभियान के विवरण पर करीबी नज़र रखेंगे, जो बेसेंट की प्रेस कॉन्फ्रेंस के ज़रिए सामने आने की उम्मीद है, साथ ही दुनिया भर में लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड यील्ड में तनाव — या राहत — के किसी भी और संकेत पर भी। विशेष रूप से भारतीय बाज़ारों के लिए, कच्चे तेल की कीमतों की दिशा और महंगाई तथा रुपये पर इसके प्रभाव प्रमुख विषय बने रहने की संभावना है, जबकि सोने की निरंतर मज़बूती यह दर्शाती है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल दृढ़ता से जोखिम-से-बचाव के मोड में बने हुए हैं।

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*नोट: सोना, चांदी, मुद्रा और कच्चे तेल के इंट्राडे भाव कारोबारी सत्र के दौरान बदलते रहते हैं — उपरोक्त आंकड़े शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 तक रिपोर्ट किए गए भावों को दर्शाते हैं ।*

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