मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में आज यानी 5 अक्टूबर को सुनवाई होगी। याचिकाओं में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़े कथित एकतरफा फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं। सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच करेगी।
क्या है पूरा मामला
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कुछ फैसले अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने ऐसे फैसलों को रद्द करने और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से करीब 14 ऐसे फैसलों या आदेशों का जिक्र किया गया है, जिन पर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से आपत्ति दर्ज किए जाने का दावा है।
CEC को काम से अलग रखने की मांग
पटना के राकेश कुमार सिंह की याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है और इसके अधिकारों का इस्तेमाल अकेले नहीं किया जा सकता। याचिका में विवादित फैसलों से जुड़े मूल रिकॉर्ड की जांच की मांग भी की गई है।
अंतरिम राहत के तौर पर ज्ञानेश कुमार को CEC के कामकाज से अलग रखने की मांग की गई है।
SIT जांच और 13 करोड़ नामों का दावा
दूसरी याचिका एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल की गई है। इसमें कथित एकतरफा फैसलों को रद्द करने के साथ रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच आयोग या SIT बनाने की मांग की गई है।
याचिका में ECINet और ERONet डेटाबेस के फोरेंसिक ऑडिट और SIR के दौरान 30 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की परिस्थितियों की जांच की मांग का भी उल्लेख है। यह आंकड़ा याचिका में किए गए दावे के तौर पर सामने आया है।
Form 6 और वोटर डेटा पर भी सवाल
याचिका में Form 6 में कथित बदलाव और वोटर डेटा को सेंट्रलाइज करने से जुड़े आरोप भी लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता का दावा है कि कुछ सॉफ्टवेयर बदलाव निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप नहीं किए गए।
पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट से जुड़े 16.10 लाख से अधिक अपीलों का भी याचिका में उल्लेख किया गया है।
14 आपत्तियों से शुरू हुआ विवाद
इस मामले की पृष्ठभूमि में एक मीडिया रिपोर्ट भी है, जिसमें दावा किया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR प्रक्रिया से जुड़े फैसलों पर पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक आपत्ति दर्ज कराई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आरोपों को अलग तरीके से देखा है। आयोग का कहना है कि संस्थानों में अलग-अलग विचार और टिप्पणियां सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हैं और उसके आदेश कानूनी एवं निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत जारी किए गए हैं।
अब सुप्रीम कोर्ट के सामने क्या सवाल
सुनवाई में मुख्य सवालों में यह शामिल है कि क्या CEC अकेले ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं जो पूरे चुनाव आयोग को दिए गए हैं और क्या कथित तौर पर अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों की वैधता की न्यायिक जांच हो सकती है।
याचिकाकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार को पद के कामकाज से अलग रखने, विवादित फैसलों को रद्द करने और जांच कराने जैसी राहत मांगी है। फिलहाल इन सभी आरोपों और मांगों पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आना बाकी है।