नेपाल में पहली बार ‘हरित चुनाव’: प्लास्टिक बैन, ई-वाहनों की अनिवार्यता और सख्त नियम

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नेपाल में पहली बार ‘हरित चुनाव’: प्लास्टिक बैन, ई-वाहनों की अनिवार्यता और सख्त नियम

नेपाल में पहली बार ‘हरित चुनाव’ प्लास्टिक बैन ई-वाहनों की अनिवार्यता और सख्त नियम

5 मार्च की वोटिंग से पहले बड़ा फैसला

Nepal Green Election Rules: नेपाल इस बार अपने आम चुनावों को सिर्फ एक राजनीतिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक पर्यावरणीय जिम्मेदारी के रूप में देखने जा रहा है। चुनाव आयोग ने पहली बार ‘ग्रीन इलेक्शन’ आचार संहिता लागू की है, जो आने वाले 5 मार्च के मतदान को पूरी तरह पर्यावरण-अनुकूल बनाने की कोशिश है। देश की राजनीति, प्रशासन और आम नागरिक—तीनों पर इस फैसले का असर साफ दिख रहा है।

Nepal Green Election Code Eco-Friendly Rules for March Polls

काठमांडू की गलियों में चुनावी चर्चा आम बात है, लेकिन इस बार पोस्टरों और बैनरों का जंगल नजर नहीं आ रहा। वजह है—प्लास्टिक और गैर-जैव अपघटित सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध। आयोग ने साफ कहा है कि चुनावी प्रचार में पॉलीथीन, PVC फ़्लेक्स, प्लास्टिक बैनर या डिस्पोज़ल सामग्री किसी भी रूप में इस्तेमाल नहीं की जाएगी।

पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचाएँ

माई रिपब्लिका ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि आयोग द्वारा जारी किए गए मसौदे के अध्याय 6 में यह साफ बताया गया है कि सभी चुनावी गतिविधियाँ ऐसी हों जो पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचाएँ। यह पहली बार है जब नेपाल ने किसी चुनाव के लिए इतनी विस्तृत पर्यावरणीय शर्तें लागू की हैं।

चुनावी अभियानों में भारी बदलाव

राजनीतिक दलों को न सिर्फ प्लास्टिक से दूरी रखने को कहा गया है, बल्कि ईंधन-चलित वाहनों के बजाय अधिकतम इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग पर जोर दिया गया है। यह कदम देश में बढ़ते वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। काठमांडू पोस्ट के अनुसार, यह निर्देश चुनावी अभियानों में भारी बदलाव ला सकता है, क्योंकि नेपाल में राजनीतिक रैलियाँ अक्सर बड़ी गाड़ियों के काफिलों के साथ निकाली जाती हैं।

चुनावी कार्यक्रम अपने पीछे कूड़ा-कचरा न छोड़े

चुनावी आयोजकों को रैलियों और सभाओं के बाद कचरा खुद साफ करने की जिम्मेदारी दी गई है। आयोग का उद्देश्य है कि कोई भी चुनावी कार्यक्रम अपने पीछे कूड़ा-कचरा न छोड़े। यह निर्देश काफी सख्त है और उम्मीद है कि इससे सार्वजनिक जगहों पर कचरे का बोझ पहले की तुलना में काफी कम होगा।

इसके अलावा,

आयोग ने उम्मीदवारों और दलों को डिजिटल प्रचार को प्राथमिकता देने के लिए कहा है। इसका असर यह होगा कि पोस्टरों, फ्लेक्स और बड़े-बड़े होर्डिंग्स पर होने वाला खर्च कम होगा और पर्यावरण को भी राहत मिलेगी। पार्टियों को यह भी कहा गया है कि अपने कार्यक्रमों में ध्वनि, वायु और जल प्रदूषण पर नियंत्रण रखें।

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