NCERT ने ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर पर बिना शर्त माफी मांगी, किताब बाजार से हटाई

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NCERT ने ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर पर बिना शर्त माफी मांगी, किताब बाजार से हटाई

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NCERT Book Withdrawal: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की किताब “समाज की खोज: भारत और उससे आगे (भाग-II)” में शामिल विवादित अध्याय “हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका” को लेकर सार्वजनिक रूप से बिना शर्त माफी मांग ली है। साथ ही संस्था ने पूरी किताब को भी बाजार से वापस लेने का फैसला किया है।

NCERT Book Withdrawal: विवाद का कारण

अध्याय IV में न्यायपालिका से जुड़े संदर्भ और उदाहरण दिए गए थे, जिनमें ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ का विषय सबसे विवादास्पद साबित हुआ। इस सामग्री को लेकर शिक्षा जगत और सोशल मीडिया में तीखी प्रतिक्रिया आई। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की और अदालत से स्वतः संज्ञान लेने का आग्रह किया।

[caption id="attachment_139880" align="alignnone" width="1076"]प्रेस नोट प्रेस नोट[/caption]

NCERT Book Withdrawal: एनसीईआरटी का बयान

10 मार्च 2026 को जारी प्रेस रिलीज में परिषद ने कहा:“एनसीईआरटी के निदेशक और सदस्यों की ओर से चैप्टर IV के लिए बिना शर्त और पूर्ण माफी मांगी जाती है। विवाद को देखते हुए पूरी पुस्तक को वापस लिया गया है और यह अब बाजार में उपलब्ध नहीं होगी।”एनसीईआरटी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था की प्रतिष्ठा को प्रभावित करना नहीं था।

सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया

भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने इस मामले पर कड़ी टिप्पणी की और कहा:“मैं किसी को भी इस संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।मुख्य न्यायाधीश ने इसे सोची-समझी कोशिश बताते हुए वरिष्ठ वकीलों सिब्बल और सिंघवी का आभार भी व्यक्त किया।

किताब वापस लेने के बाद शिक्षा जगत में चर्चा

इस घटना के बाद शिक्षा जगत में सवाल उठे हैं कि स्कूल की किताबों में सामग्री की समीक्षा प्रक्रिया कितनी सख्त है और विवादित सामग्री किताब में कैसे शामिल हो गई। एनसीईआरटी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए विवादित चैप्टर हटाया और माफी मांगी.विशेषज्ञों का कहना है कि अब एनसीईआरटी इस किताब की सामग्री की दोबारा समीक्षा कर सकती है और आवश्यक बदलाव के बाद ही इसे फिर से प्रकाशित किया जाएगा।

 

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