रक्षा मंत्रालय में रिश्वत का खेल: लेफ्टिनेंट कर्नल गिरफ्तार, करोड़ों की नकदी निकली

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रक्षा मंत्रालय में रिश्वत का खेल: लेफ्टिनेंट कर्नल गिरफ्तार, करोड़ों की नकदी निकली

रक्षा मंत्रालय में रिश्वत का खेल लेफ्टिनेंट कर्नल गिरफ्तार करोड़ों की नकदी निकली

CBI Arrests Army Officer: देश की सुरक्षा से जुड़े संस्थानों में पारदर्शिता की उम्मीद सबसे ज्यादा की जाती है। लेकिन जब उसी सिस्टम के भीतर भ्रष्टाचार की परतें खुलती हैं, तो सवाल सिर्फ एक अफसर पर नहीं, पूरी व्यवस्था पर उठने लगते हैं। ऐसा ही एक मामला अब रक्षा मंत्रालय से सामने आया है  जहां एक तैनात आर्मी अफसर को CBI ने रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है।

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Defence Ministry Bribery Case: केंद्रीय जांच ब्यूरो ने शनिवार को रक्षा मंत्रालय के उत्पादन विभाग में तैनात लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक कुमार शर्मा को रिश्वतखोरी के आरोप में हिरासत में लिया । जांच एजेंसी का कहना है कि उन्होंने बेंगलुरु स्थित एक निजी कंपनी से तीन लाख रुपये की रिश्वत ली थी. मामला यहीं नहीं रुका  छापेमारी के दौरान उनके घर से 2.36 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की गई ।

पत्नी भी जांच के दायरे में

इस मामले में एक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि लेफ्टिनेंट कर्नल की पत्नी कर्नल काजल बाली का नाम भी FIR में शामिल किया गया है.  काजल बाली फिलहाल राजस्थान के श्रीगंगानगर में डिवीजन ऑर्डिनेंस यूनिट में कमांडिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हैं।

CBI की टीम ने श्रीगंगानगर में उनके आवास पर भी तलाशी ली जहां से 10 लाख रुपये नकद मिलने की पुष्टि हुई है । फिलहाल एजेंसी इस बात की जांच कर रही है कि यह रकम किस स्रोत से आई और इसका रिश्वत मामले से कोई सीधा या परोक्ष संबंध है या नहीं ।

बिचौलिया भी गिरफ्तार

जांच में सामने आया कि इस सौदे में एक बिचौलिया की भी भूमिका थी. विनोद कुमार नाम के व्यक्ति को भी CBI ने गिरफ्तार किया है  एजेंसी के अनुसार इसी बिचौलिए ने 18 दिसंबर को कंपनी की ओर से लेफ्टिनेंट कर्नल को रिश्वत की रकम पहुंचाई थी । CBI का कहना है कि आरोपी अफसर रक्षा उत्पादों के निर्माण और निर्यात से जुड़ी निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के बदले पैसे ले रहे थे।

कैसे खुला मामला

यह पूरा केस 19 दिसंबर को मिली एक गोपनीय सूचना के बाद दर्ज किया गया. जानकारी मिली थी कि बेंगलुरु की एक कंपनी के प्रतिनिधि लगातार रक्षा मंत्रालय में तैनात अफसरों के संपर्क में हैं । जांच के दौरान राजीव यादव और रवजीत सिंह नाम के दो लोगों की भूमिका भी सामने आई  जो कथित तौर पर कंपनी के भारत में ऑपरेशन संभाल रहे थे। जांच एजेंसी का दावा है कि यह कंपनी दुबई से जुड़ी हुई है और भारत में सरकारी मंजूरियों के लिए गलत तरीके अपनाए जा रहे थे।

कई शहरों में छापेमारी

CBI ने दिल्ली, बेंगलुरु, जम्मू और श्रीगंगानगर समेत कई जगहों पर एक साथ कार्रवाई की,  दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 23 दिसंबर तक CBI की हिरासत में भेज दिया गया है।

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