ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने फिलिस्तीन को देश की मान्यता दी

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ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने फिलिस्तीन को देश की मान्यता दी

 ब्रिटेन कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने फिलिस्तीन को देश की मान्यता दी

नेतन्याहू बोले- यह आतंकवाद को इनाम देना है!

वह ऐतिहासिक पल था, जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने लंदन स्थित 10 डाउनिंग स्ट्रीट से रविवार को फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता देने का ऐलान किया। इसके साथ ही कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने भी इसी कदम का अनुसरण किया, जिससे फिलिस्तीन को अब तीन और प्रमुख देशों से राष्ट्रीय मान्यता मिली है।

ब्रिटेन का कदम: शांति प्रक्रिया की उम्मीद

कीर स्टार्मर ने इस निर्णय को इजराइल के अवैध कब्जे को खत्म करने और एक स्थायी शांति प्रक्रिया की ओर बढ़ने के रूप में प्रस्तुत किया। उनका कहना था कि यह कदम फिलिस्तीन में एक नई सरकार की स्थापना की दिशा में मदद करेगा, जो इजराइल के साथ मिलकर काम करेगी, लेकिन इसमें हमास जैसी आतंकवादी संगठनों की कोई भूमिका नहीं होगी।  britain-canada-australia-recognize-palestine-netanyahu-reaction  स्टार्मर ने स्पष्ट किया कि यह फैसला इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू की गाजा में सैन्य कार्रवाई को लेकर उठाए गए विवादास्पद कदमों के परिणामस्वरूप लिया गया। उन्होंने कहा कि अगर इजराइल ने अधिक शांति और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करते हुए कार्रवाई की होती, तो शायद यह कदम न उठाना पड़ता। ब्रिटिश डिप्टी प्रधानमंत्री डेविड लैमी ने भी इस फैसले को ‘टू स्टेट सॉल्यूशन’ की ओर एक सकारात्मक कदम बताया। उनका कहना था कि फिलिस्तीन की मान्यता से तुरंत कोई नया देश नहीं बन जाएगा, बल्कि यह कदम शांति प्रक्रिया का हिस्सा है, ताकि भविष्य में इजराइल और फिलिस्तीन के बीच दो स्वतंत्र देशों की स्थापना हो सके।

नेतन्याहू का कड़ा विरोध: "आतंकवाद को इनाम देना"

वहीं, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस कदम को एक खतरनाक मिसाल और आतंकवाद को इनाम देने जैसा बताया। उनका कहना था कि ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया का यह फैसला फिलिस्तीनी आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला है और इसे कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह जॉर्डन नदी के पश्चिम में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना को पूरी तरह से खारिज करते हैं और उनके शासनकाल में ऐसा कभी नहीं होगा।

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इजराइली प्रधानमंत्री ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए यह भी कहा कि उनकी सरकार ने वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियों को दोगुना कर दिया है और इसे आगे बढ़ाने का इरादा रखती है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस मान्यता पर प्रतिक्रिया देने के बाद वह अमेरिका से वापस लौटने के बाद और कड़े कदम उठाएंगे।

फिलिस्तीन को मान्यता देने का वैश्विक संदर्भ

इससे पहले, भारत, चीन और अन्य 140 से ज्यादा देशों ने फिलिस्तीन को स्वतंत्र देश के रूप में मान्यता दी थी। अब ब्रिटेन, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया का यह कदम इस संघर्ष को वैश्विक स्तर पर और भी गंभीर बना सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में यह एक बड़ा संदेश दे रहा है कि फिलिस्तीनी मुद्दे को अब और अनदेखा नहीं किया जा सकता। Watch: 51 शक्ति पीठ जानिए रहस्य और कहाँ-कहाँ गिरे थे माता सती के अंग?

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