भारत के सबसे बड़े न्यूक्लियर पावर प्लांट कुडनकुलम का डाटा लीक हो गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हैकर्स ग्रुप ‘वर्ल्ड लीक्स’ ने डार्क वेब पर इन दस्तावेजों को अपलोड करने का दावा किया है। इनमें पॉवर प्लांट के कुछ हिस्सों के ब्लूप्रिंट, सप्लायर्स की लिस्ट, कंट्रोल रूम और अन्य रिकॉर्ड सार्वजनिक किए गए है।
जून में लीक होने का दावा
सर्वर मई में हैक हुआ था, जून में दस्तावेज लीक होने का दावा किया गया। इसकी जानकारी अब जाकर सामने आई। तमिलनाडु के कुडनकुलम प्रोजेक्ट पर काम कर रहे अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने माना कि थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा का सर्वर हैक किया गया। इसकी जानकारी केंद्र सरकार को दे दी गई है। कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया कि कौन सा डेटा लीक हुआ। न्यूक्लियर पॉवर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड रिलायंस के साथ मिलकर मामले की समीक्षा कर रहा है। बता दे भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम भी इस डेटा लीक की जांच कर रही है।
कैसे हुआ डेटा लीक?
रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट की U-3 और यूनिट-4 प्रोजेक्ट का ठेकेदार है। कंपनी का कुछ डेटा थर्ड-पार्टी डेटा सेंटर कंपनी योट्टा के सर्वर पर था। योट्टा ने सर्वर पर 29 मई 2026 को संदिग्ध गतिविधि देखी थी। दावा किया गया था कि साइबर अटैक रोक दिया। जून के आखिर में रिलायंस ने योट्टा को बताया कि वर्ल्ड लीक्स नामक हैकर समूह डेटा चोरी का दावा कर रहा है। डार्क वेब पर करीब 8.58 लाख फाइलों में से लगभग 19000 संवेदनशील दस्तावेज अपलोड करने का दावा किया गया।
2019 में भी कुडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट के प्रशासनिक नेटवर्क में उत्तर कोरिया से जुड़े हैकर समूह का मैलवेयर मिलने की पुष्टि हुई थी। उस वक्त NPCIL ने कहा था कि संयंत्र की परिचालन प्रणाली प्रभावित नहीं हुई थी।