आज से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ, पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना का विशेष महत्व...

गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ

आज से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ, पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना का विशेष महत्व, जानिए पूजा का तरीका

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हुआ है। नौ दिनों तक विभिन्न देवी स्वरूपों की पूजा की जाएगी।

आज से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना का विशेष महत्व जानिए पूजा का तरीका

आज से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ, पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना का विशेष महत्व, जानिए पूजा का तरीका

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से आज बुधवार से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हो गया. नौ दिवसीय शक्ति आराधना पर्व 23 जुलाई तक चलेगा. जहां चैत्र और शारदीय नवरात्रि में देवी के नौ स्वरूपों की सार्वजनिक रूप से पूजा की जाती है, वहीं गुप्त नवरात्रि साधना, उपासना, मंत्र-जप और तांत्रिक साधनाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से मां भगवती की आराधना कर सुख, समृद्धि और मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं.हालांकि गृहस्थ लोग भी सरल विधि से मां भगवती की पूजा कर सकते हैं।

प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा

गुप्त नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है. प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में घटस्थापना कर नौ दिन की आराधना का संकल्प लिया जाता है. मान्यता है कि मां शैलपुत्री की कृपा से जीवन में स्थिरता, साहस और आत्मविश्वास का संचार होता है. पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण उन्हें दृढ़ता और अटल संकल्प का प्रतीक माना जाता है.प्रथम दिन की साधना का संबंध शरीर के मूलाधार चक्र से माना जाता है. मां शैलपुत्री की आराधना से मूलाधार चक्र को जागृत करने का प्रयास किया जाता है. इससे व्यक्ति में सुरक्षा, आत्मबल और जीवन की आधारभूत शक्तियां मजबूत होती है.

गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में मां शक्ति के दस स्वरूपों की उपासना की जाती है। इनमें मां काली, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला देवी शामिल हैं। साधक इन देवी स्वरूपों की पूजा कर आध्यात्मिक शक्ति और सिद्धियों की कामना करते हैं।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना के साथ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ होगा।

कलश स्थापना के लिए शुभ समय: प्रातः 5:33 बजे से प्रातः10:09 बजे तक

इस शुभ अवधि में विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा की आराधना करना शुभ माना जाता है।

गृहस्थ लोग इस विधि से करें मां दुर्गा की पूजा

गृहस्थ परिवारों के लिए गुप्त नवरात्रि में सामान्य और सात्विक पूजा करना शुभ माना जाता है।

सुबह स्नान कर घर की साफ-सफाई करें और पूजा स्थान को शुद्ध करें।

ईशान कोण में लाल वस्त्र बिछाकर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।

मिट्टी के पात्र में जौ बोएं और कलश स्थापना करें।

कलश में जल, अक्षत, सुपारी और सिक्का डालकर आम के पत्तों और नारियल से सजाएं।

मां को लाल पुष्प, रोली, अक्षत, चुनरी, फल और नैवेद्य अर्पित करें।

दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी मंत्रों का पाठ करें।

नौ दिनों तक सात्विक भोजन और सकारात्मक विचारों का पालन करें।

गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की आराधना करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं और घर में सुख-समृद्धि का वातावरण बनता है। इस दौरान कई श्रद्धालु कन्या पूजन, दान-पुण्य और सेवा कार्य भी करते हैं।

पूजा में रखें इन बातों का ध्यान

गुप्त नवरात्रि में तांत्रिक साधनाओं का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन ऐसी साधनाएं बिना किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के नहीं करनी चाहिए।
गृहस्थ लोगों के लिए श्रद्धा, संयम, मंत्र जाप और सात्विक जीवनशैली के साथ मां दुर्गा की पूजा करना ही सबसे उत्तम माना जाता है।
गुप्त नवरात्रि का मुख्य उद्देश्य केवल अनुष्ठान नहीं, बल्कि मन को शुद्ध करना, सकारात्मक सोच अपनाना और मां शक्ति के प्रति आस्था को मजबूत करना है।

इन मंत्रों का जाप करें

मां शैलपुत्री की कृपा प्राप्त करने के लिए श्रद्धापूर्वक इन मंत्रों का जप किया जा सकता है

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं शैलपुत्र्यै नमः।
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥

संबंधित सामग्री

क्यों चढ़ाया जाता है? शिवलिंग पर 3 पत्तियों वाला ही बेलपत्र जानें इसके पीछे की मान्यता

सनातन

क्यों चढ़ाया जाता है? शिवलिंग पर 3 पत्तियों वाला ही बेलपत्र जानें इसके पीछे की मान्यता

शिवलिंग पर तीन पत्तियों वाला बेलपत्र चढ़ाने की परंपरा और इसके पीछे की धार्मिक मान्यताओं की व्याख्या। यह प्रत्येक पत्ती भगवान शिव के गुणों का प्रतिनिधित्व करती है।

रविवार प्रदोष व्रत पर महादेव को चढ़ाएं उनका प्रिय भोग, जीवन में बनी रहेगी सुख-शांति

सनातन

रविवार प्रदोष व्रत पर महादेव को चढ़ाएं उनका प्रिय भोग, जीवन में बनी रहेगी सुख-शांति

12 जुलाई 2026, रविवार को आषाढ़ माह में रवि प्रदोष व्रत का आयोजन होगा। इस दिन शिव जी की विशेष पूजा की जाएगी और उन्हें खीर का भोग लगाया जाएगा।

Snan Purnima 2026: भगवान जगन्नाथ का किया जाएगा महाअभिषेक, फिर होंगे बीमार

सनातन

Snan Purnima 2026: भगवान जगन्नाथ का किया जाएगा महाअभिषेक, फिर होंगे बीमार

29 जून 2026 को भगवान जगन्नाथ का स्नान पूर्णिमा उत्सव मनाया जाएगा, जिसमें 108 पवित्र कलशों से महाअभिषेक होगा और यह उत्सव रथ यात्रा की शुरुआत का प्रतीक है।

Nirjala Ekadashi 2026 Date: कब है निर्जला एकादशी?  जानिए व्रत का महत्व

सनातन

Nirjala Ekadashi 2026 Date: कब है निर्जला एकादशी? जानिए व्रत का महत्व

2026 में निर्जला एकादशी 25 जून को मनाई जाएगी, यह व्रत हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, जो साल भर की सभी एकादशियों के पुण्य के बराबर फल प्रदान करता है।

Dhumavati Jayanti 2026 Date: कब है धूमावती जयंती? जानिए इनके स्वरुप की कहानी

सनातन

Dhumavati Jayanti 2026 Date: कब है धूमावती जयंती? जानिए इनके स्वरुप की कहानी

धूमावती जयंती, जो कि ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाई जाती है, विशेष रूप से तंत्र साधना और दुख निवारण के लिए महत्वपूर्ण है।