Haryana news: हरियाणा में सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों को सुचारु बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बड़ा फैसला लिया है। मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के चलते तारकोल की कमी और बढ़ती कीमतों के बीच राज्य सरकार ने अगले छह महीनों तक इंपोर्टेड तारकोल के उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस फैसले का उद्देश्य विकास कार्यों को रुकने से बचाना है।
तारकोल संकट के बीच बड़ा फैसला

हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क निर्माण से जुड़े सभी विभागों के कार्यों का जायजा लिया। अधिकारियों ने जानकारी दी कि 28 फरवरी को तारकोल की कीमत 46,402 रुपये प्रति मीट्रिक टन थी, जो 1 अप्रैल तक बढ़कर 76,152 रुपये प्रति मीट्रिक टन हो गई। इसके अलावा, आपूर्ति करने वाली कंपनी IOCL ने 50 प्रतिशत तक सप्लाई प्रभावित होने की सूचना दी है। ऐसे में केंद्र की अनुमति के बाद राज्य में भी इंपोर्टेड तारकोल के इस्तेमाल को हरी झंडी दे दी गई।
63170 किलोमीटर सड़क निर्माण का लक्ष्य
इस दौरान मुख्यमंत्री सैनी ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में प्रदेश में कुल 63,170 किलोमीटर सड़कों के निर्माण और मरम्मत का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वित्त वर्ष 2025-26 के अधूरे कार्यों को जल्द पूरा कर आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के लक्ष्यों को समय पर हासिल किया जाए।
गड्ढामुक्त सड़कों पर जोर

आगे सीएम सैनी ने स्पष्ट कहा कि खराब सड़कों से आमजन को होने वाली परेशानी किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी विभागों को पैच वर्क मशीनों का उपयोग कर सड़कों की मरम्मत तेजी से करने के निर्देश दिए। साथ ही ‘म्हारी सड़क’ ऐप पर आने वाली शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर भी जोर दिया।
गुणवत्ता और जवाबदेही पर बरती जाएगी सख्ती
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को पीडब्ल्यूडी (बीएंडआर) के मानकों के अनुसार सड़क निर्माण करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी निर्माण कंपनियों की है, उनसे तय समय में काम पूरा कराया जाए। इसके अलावा, प्रत्येक विभाग को मासिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए शहरों में सड़कों की खराब स्थिति को सुधारने के लिए मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों के बीच जिम्मेदारी स्पष्ट करने के निर्देश दिए। इसके लिए अधिकारियों की एक कमेटी गठित की जाएगी। साथ ही, शहरी क्षेत्रों में ‘स्मार्ट रोड’ विकसित करने पर भी जोर दिया गया, जिससे नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
