अमृतसर। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ की रिलीज पर रोक के विरोध में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) ने अमृतसर में प्रदर्शन किया। श्री हरिमंदिर साहिब के बाहर प्लाजा में बड़ी संख्या में संगत एकत्र हुई और फिल्म पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने की मांग की। प्रदर्शन का नेतृत्व SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने किया।
एक ज्ञापन सौंपकर फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हटाने की मांग
प्रदर्शन के बाद SGPC की ओर से श्री हरिमंदिर साहिब से डीसी कार्यालय तक रोष मार्च निकाला गया। इस दौरान पंजाब के राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपकर फिल्म की रिलीज पर लगी रोक हटाने की मांग की गई।
SGPC अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि भाई जसवंत सिंह खालड़ा ने पंजाब में अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर कर मानवाधिकारों की रक्षा के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने कहा कि खालड़ा का संघर्ष इतिहास का अहम हिस्सा है और उनके जीवन पर बनी फिल्म को रिलीज से रोकना दुर्भाग्यपूर्ण है।
सेंसर बोर्ड द्वारा कई बदलाव और कट लगाए गए
धामी ने आरोप लगाया कि फिल्म को लेकर सेंसर बोर्ड द्वारा कई बदलाव और कट लगाए गए हैं। इसके बावजूद रिलीज की अनुमति नहीं देना कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि फिल्म पर लगाया गया प्रतिबंध तुरंत हटाया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी पंजाब के इतिहास और उस दौर की घटनाओं को समझ सके।
फिल्मों के मूल्यांकन में संतुलन बना रहे
प्रदर्शन के दौरान SGPC सदस्यों ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए और कहा कि ऐतिहासिक व सामाजिक विषयों पर आधारित फिल्मों के साथ निष्पक्ष व्यवहार होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि सेंसर बोर्ड में SGPC के एक प्रतिनिधि को शामिल किया जाए, ताकि धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व से जुड़े विषयों पर बनने वाली फिल्मों के मूल्यांकन में संतुलन बना रहे।
फिलहाल फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर विवाद जारी है। SGPC ने स्पष्ट किया है कि जब तक फिल्म पर लगी रोक नहीं हटाई जाती, तब तक वह इस मुद्दे को लेकर अपनी आवाज उठाती रहेगी।