उज्जैन में नागपंचमी पर रविवार आधी रात भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट खोल दिए गए। महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे तल पर स्थित इस मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं। कपाट खुलते ही देशभर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने दर्शन शुरू कर दिए। सीएम ड़ॉ मोहन यादव ने सभी प्रदेशवासियों को सावन सोमवार और नागपंचमी की बधाई दी.

इस बार नागपंचमी के साथ सावन का तीसरा सोमवार भी है। ऐसे में उज्जैन में श्रद्धालुओं की भीड़ ज्यादा रहने की संभावना है। नागचंद्रेश्वर के दर्शन सोमवार रात 12 बजे तक यानी पूरे 24 घंटे जारी रहेंगे।
आधी रात को हुई पहली पूजा

कपाट खुलने से करीब आधे घंटे पहले रात 11:30 बजे प्रथम पूजन शुरू हुआ। मध्यरात्रि में पट खुलने के बाद श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरि महाराज ने भगवान नागचंद्रेश्वर का पूजन और अभिषेक किया।पहली पूजा के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए मंदिर खोल दिया गया। नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की तीन विशेष पूजाएं होने की परंपरा है। दूसरी पूजा सोमवार दोपहर 12 बजे होगी, जबकि तीसरी पूजा शाम को महाकाल की संध्या आरती के बाद मंदिर के पुजारी और पुरोहित करेंगे।
नाग पर विराजमान हैं शिव-पार्वती और गणेश
नागचंद्रेश्वर मंदिर में भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की दुर्लभ प्रतिमा स्थापित है। इसमें भगवान शिव नाग के फन पर विराजमान हैं और उनके गले व भुजाओं पर भी नाग लिपटे हुए हैं। प्रतिमा के साथ नंदी और सिंह भी दिखाई देते हैं।साल में सिर्फ एक दिन होने वाले इन दर्शनों के कारण नागपंचमी पर मंदिर में देशभर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
तीन मंजिलों में बंटा है महाकाल मंदिर का शिखर
मान्यता के अनुसार महाकालेश्वर मंदिर का शिखर तीन खंडों में विभाजित है। सबसे नीचे महाकालेश्वर, दूसरे खंड में ओंकारेश्वर और तीसरे तल पर नागचंद्रेश्वर भगवान का मंदिर है।मंदिर के निर्माण को लेकर मान्यता है कि परमार राजा भोज ने करीब 1050 ईस्वी में इसका निर्माण कराया था। बाद में 1732 में सिंधिया शासनकाल में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ। नागचंद्रेश्वर की प्रतिमा नेपाल से लाए जाने की भी मान्यता है।
सामान्य और शीघ्र दर्शन के लिए अलग रास्ते
सामान्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का प्रवेश कर्कराज पार्किंग से होगा। यहां से भील समाज धर्मशाला, गोंड मोहल्ला, चारधाम, हरसिद्धि चौराहा और बड़ा गणेश होते हुए प्रवेश द्वार नंबर-4 से मंदिर परिसर में पहुंचेंगे।शीघ्र दर्शन के लिए हरसिद्धि पाल की ओर से प्रवेश निर्धारित किया गया है। श्रद्धालु बड़ा गणेश मार्ग से प्रवेश द्वार नंबर-5 होकर विश्रामधाम पहुंचेंगे और वहां से नागचंद्रेश्वर के दर्शन करेंगे।
आज महाकाल की सवारी भी निकलेगी

नागपंचमी और सावन का तीसरा सोमवार एक ही दिन होने से उज्जैन में आज धार्मिक आयोजनों का खास संयोग है। भगवान महाकाल की सवारी भी नगर भ्रमण पर निकलेगी।