आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की द्वितीय देवी माता तारा, जानिए पूजा विधि

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि पूजा

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की द्वितीय देवी माता तारा, जानिए पूजा विधि

आषाढ़ मास के दौरान मनाए जाने वाले गुप्त नवरात्रि में माता तारा की पूजा की विशेष विधियाँ और उनके महत्व के बारे में जानिए।

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की द्वितीय देवी माता तारा जानिए पूजा विधि

आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की द्वितीय देवी माता तारा, जानिए पूजा विधि

आषाढ़ मास में मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि में देवी के दस महाविद्या स्वरूपों की साधना का विशेष महत्व माना जाता है। आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के दूसरे दिन द्वितीय महाविद्या माता तारा की साधना की जाती है। उन्हें दश महाविद्याओं में द्वितीय महाविद्या का स्थान प्राप्त है। इनकी उपासना से बुद्धि, आध्यात्मिक ज्ञान और आत्मविश्वास की प्राप्ति होने की मान्यता है। 


 

माता 'तारिणी' 

तंत्र शास्त्र और सनातन परंपरा में मां तारा को 'तारिणी' अर्थात् भवसागर से तारने वाली कहा गया है। माना जाता है कि समुद्र मंथन के समय जब भगवान शिव ने विषपान किया और उनके शरीर में तीव्र जलन होने लगी, तब मां तारा ने ही माता के रूप में उन्हें अपना दुग्धपान कराकर शांत किया था। मां तारा की साधना मुख्य रूप से ज्ञान, तीव्र बुद्धि, बोलने की शक्ति/ वाकसिद्धि, और आर्थिक संकटों से मुक्ति के लिए की जाती है। गुप्त नवरात्रि में मां तारा की पूजा भी अत्यंत शुद्धता और एकाग्रता के साथ की जानी चाहिए। इसकी प्रामाणिक विधि इस प्रकार है:
 
मां तारा की सात्विक पूजा विधि
 
1. मां तारा का पूजन रात्रि काल में विशेष फलदायी माना गया है। सुबह तथा रात्रि के समय स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मां तारा की पूजा के लिए गुलाबी या नीले रंग के वस्त्र और आसन का प्रयोग करना उत्तम माना जाता है। खास तौर पर मां काली की तरह ही मां तारा की पूजा भी सूर्यास्त के बाद या मध्यरात्रि निशिथ काल में करना अधिक फलदायी माना जाता है। मां की रात्रि साधना करते समय दिशा का ध्यान रखें। पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
 
2. जहां माता की प्रतिमा की स्थापना करना हो, उस स्थान की शुद्धि करके लकड़ी की चौकी पर नीला या साफ वस्त्र बिछाएं। उस पर माता तारा की तस्वीर या 'तारा यंत्र' स्थापित करें। अक्षत/ चावल की ढेरी बनाकर उस पर घी या चमेली के तेल का दीपक जलाएं।
 
3. मां तारा की साधना में नीले रंग का विशेष महत्व है। अत: उन्हें को नीले रंग के फूल- जैसे अपराजिता या नीलकमल अर्पित करना अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा उन्हें अक्षत, कुमकुम, धूप और कपूर अर्पित करें।
 
4. वाकसिद्धि और ज्ञान प्राप्ति के लिए शांत चित्त होकर बैठें और रुद्राक्ष की माला से मां तारा के विशेष मंत्रों का कम से कम एक माला/ 108 बार जाप करें। मां तारा को 'उग्रतारा' भी कहा जाता है, इसलिए इनकी पूजा के दौरान मन को पूरी तरह शांत रखें और फालतू की बातचीत से बचते हुए मौन का पालन करें। इसके बाद तारा कवच या तारा अष्टक का पाठ करें।
 
5. पूजन के पश्चात माता को सफेद मिठाई, नारियल या शहद का भोग लगाएं। इसके बाद आरती करें और हाथ जोड़कर पूजा के दौरान जाने-अनजाने हुई त्रुटियों के लिए क्षमा प्रार्थना करें।

मां तारा के सिद्ध मंत्र

मां तारा की कृपा पाने के लिए इस एकाक्षरी या त्र्याक्षरी मंत्र का जाप किया जा सकता है: जैसे- 'ॐ त्रीं नमः' तथा सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली माता तारा के मंत्र: 'ॐ ह्रीं स्त्रीं हुं फट्' का जाप करना बहुत फलदायी होता है। 


 

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