मध्य पूर्व में ईरान और सऊदी अरब के बीच तनाव चरम पर

ईरान जंग में सऊदी की एंट्री, US संग मिलकर किया हमला; 10 लड़ाकों की मौत

AI

मध्य पूर्व में जारी तनाव अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव के बीच अब सऊदी अरब भी सीधे सैन्य कार्रवाई में शामिल हो गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने मंगलवार रात इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) के कई ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 10 लड़ाकों की मौत हुई है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं।हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, हालांकि जॉर्डन की एयर डिफेंस प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराने का दावा किया है।

अमेरिका ने बताई कार्रवाई की वजह

अमेरिकी सेना का कहना है कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहां से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। इसी इनपुट के आधार पर संयुक्त अभियान चलाया गया।इराक के निनेवेह समेत कई इलाकों में हुए इन हमलों से कई इमारतों और सैन्य ठिकानों को भी नुकसान पहुंचा है। PMF के अधिकारियों ने भी लड़ाकों के मारे जाने की पुष्टि की है और मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई है।

कौन हैं PMF, जिन पर हुआ हमला?

पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) इराक का सरकारी मान्यता प्राप्त अर्धसैनिक संगठन है। इसकी स्थापना 2014 में ISIS के खिलाफ लड़ाई के दौरान हुई थी। बाद में इराक सरकार ने इसे आधिकारिक सुरक्षा बल का दर्जा दिया।हालांकि PMF के कई गुटों पर ईरान के करीबी होने और अमेरिकी ठिकानों पर हमलों में शामिल रहने के आरोप लगते रहे हैं। इसी वजह से अमेरिका लंबे समय से इन समूहों को निशाना बनाता रहा है।

ट्रम्प-नेतन्याहू की बैठक में ईरान पर बनी रणनीति

इसी बीच व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच करीब 90 मिनट तक अहम बैठक हुई। बैठक के बाद नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों की प्राथमिकता एक ही है—ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना।दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा और आगे की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा की।

जेलेंस्की ने भी ट्रम्प से की मुलाकात

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रम्प से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच एयर डिफेंस सिस्टम, रक्षा सहयोग और रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। जेलेंस्की ने बताया कि रक्षा उत्पादन और कूटनीतिक प्रयासों को तेज करने पर भी सहमति बनी है।

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा विवाद

ईरान ने ओमान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें होर्मुज स्ट्रेट का संचालन क्षेत्रीय देशों की साझेदारी से करने की बात कही गई थी। तेहरान का कहना है कि इस अहम समुद्री मार्ग पर उसका नियंत्रण बना रहना चाहिए।दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने होर्मुज स्ट्रेट में कारोबारी जहाजों पर हो रहे हमलों की निंदा करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

तेल बाजार में फिर बढ़ी चिंता

मध्य पूर्व में बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। जवाबी हमलों के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 3.8% बढ़कर 87.26 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई। साथ ही सऊदी अरब की जिजान रिफाइनरी प्रभावित होने की खबरों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है।फिलहाल मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका, ईरान और उसके सहयोगियों के बीच यह सैन्य टकराव आगे किस दिशा में बढ़ता है।