Twisha Case Update: गिरिबाला और समर्थ सिंह की जमानत याचिका खारिज
भोपाल के ट्विशा शर्मा मौत मामले में रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह की जमानत अर्जी पर विशेष अदालत में सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। शाम को कोर्ट ने उनकी जमानत को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने जमानत के लिए आरोपी पक्ष की ओर से दिए तमाम तर्कों के आधार पर जमानत देने से मना कर दिया। कोर्ट ने उनपर लगे आरोपों को गंभीर माना। जिसके चलते बेल को निरस्त कर दिया गया।
बेल हुई खारिज
जमानत आवेदन सबसे पहले विशेष न्यायाधीश नीलम शुक्ला की अदालत में पेश हुआ। हालांकि, उन्होंने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। इसके बाद प्रकरण दोपहर करीब 3 बजे विशेष न्यायाधीश राम प्रताप मिश्र की अदालत में स्थानांतरित किया गया, जहां विस्तृत सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान गिरिबाला की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि वह एक महिला हैं और उनकी उम्र भी ज्यादा है। ऐसे में मानवीय आधार पर उन्हें जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। बचाव पक्ष ने यह भी कहा कि उनकी हेल्थ कंडीशन और आयु को देखते हुए उन्हें राहत दी जानी उचित होगी।
कोर्ट ने रखा फैसला सुरक्षित
वहीं, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो ने जमानत आवेदन का कड़ा विरोध किया। एजेंसी की ओर से अदालत को बताया गया कि केवल महिला होने के आधार पर जमानत देना उचित नहीं होगा। CBI ने यह भी कहा जिस प्रकरण की जांच चल रही है, उसमें मृतका भी एक महिला थी। इसलिए केवल लिंग के आधार पर राहत दिए जाने का कोई मतलब नहीं बनता। एजेंसी ने मामले की गंभीरता और जांच के विभिन्न पहलुओं का हवाला देते हुए जमानत याचिका खारिज करने की मांग की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
गिरिबाला की हालत खराब
बचाव पक्ष ने कहा कि गिरिबाला सिंह स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों से जूझ रही हैं और जेल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। उनकी लगभग 100 साल की माता उनकी देखभाल पर निर्भर हैं। वकील ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी ने जांच में सहयोग किया है, उनके जेल में रहने के दौरान घर में चोरी हुई और वह नियमित वेतन और युद्ध वीरांगना पेंशन प्राप्त करती हैं। आर्थिक रूप से सक्षम होने के कारण दहेज मांगने का आरोप नहीं माना जा सकता।