Haridwar River Festival: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज हरिद्वार में अपने दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उन्होंने हर की पैड़ी पर मां गंगा की पूजा-अर्चना कर नदी उत्सव का शुभारंभ किया और इसके बाद ऋषिकुल मैदान में आयोजित विकास संकल्प विशाल जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने धामी सरकार के चार साल पूरे होने पर अपनी उपलब्धियों का ब्योरा प्रस्तुत किया और केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में राज्य के विकास के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नदी उत्सव का शुभारंभ किया[/caption]
नदी उत्सव का शुभारंभ
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने हरिद्वार दौरे की शुरुआत पवित्र गंगा तट पर स्थित हर की पैड़ी से की। यहां उन्होंने मां गंगा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और नदी उत्सव का उद्घाटन किया। यह आयोजन गंगा नदी के संरक्षण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया। सीएम धामी ने इस अवसर पर गंगा की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह नदी उत्तराखंड की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर का प्रतीक है। उन्होंने लोगों से गंगा संरक्षण में सहयोग करने की अपील की।
चार साल की उपलब्धियां गिनाईं
हर की पैड़ी के बाद मुख्यमंत्री ऋषिकुल मैदान में आयोजित विकास संकल्प विशाल जनसभा में शामिल हुए। इस जनसभा में उन्होंने धामी सरकार के चार साल पूरे होने पर राज्य में किए गए विकास कार्यों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब उन्हें केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी थी, तब उत्तराखंड कई चुनौतियों से जूझ रहा था। सीएम धामी ने बताया कि उनकी सरकार ने विषम परिस्थितियों में भी विकास को गति दी। विशेष रूप से, उन्होंने महिला स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार में स्थापित करने के लिए एक हजार करोड़ रुपये के पैकेज की व्यवस्था की, जिससे स्थlocal उत्पादों को बढ़ावा मिला।
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Haridwar River Festival: युवाओं को मिला अवसर
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में नकलविहीन कानून और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने को अपनी सरकार की प्रमुख उपलब्धियों में गिनाया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में ये कदम उठाए गए, जिसके परिणामस्वरूप उत्तराखंड में पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित हुई। नकलविहीन कानून के लागू होने से युवाओं को निष्पक्ष रूप से सरकारी नौकरियों में अवसर प्राप्त हुए। यूसीसी लागू करने वाला उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना, जिसे धामी ने सामाजिक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया।