मध्यप्रदेश हाई कोर्ट का बड़ा फैसला

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने की भूमाफिया बिल्डर दिलीप बच्चानी व हर्षिता बच्चानी की ज़मानत अर्जी ख़ारिज

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने बिल्डर दिलीप बच्चानी और हर्षिता बच्चानी की जमानत याचिका खारिज की, दोनों पर भूमाफिया गतिविधियों का आरोप है।

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने की भूमाफिया बिल्डर दिलीप बच्चानी व  हर्षिता बच्चानी की ज़मानत अर्जी ख़ारिज

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने भूमाफिया बिल्डर दिलीप बच्चानी और हर्षिता बच्चानी की ज़मानत याचिका खारिज कीजबलपुर। मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की मुख्य पीठ ने भूमि माफिया के रूप में कुख्यात बिल्डर दिलीप बच्चानी और उनकी पत्नी हर्षिता बच्चानी की ज़मानत अर्जी को लगभग एक वर्ष तक मेरिट पर सुनवाई के बाद खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए धाराओं को अत्यंत गंभीर माना और याचिकाकर्ताओं को राहत देने से इनकार कर दिया।हाई कोर्ट ने अपने आदेश में दिलीप बच्चानी को आदतन अपरादी करार दिया। कोर्ट के अनुसार, वह जालसाजी, कब्जा और धोखाधड़ी के कई पुराने मामलों में लिप्त रहा है।

विभिन्न केसों में उसकी संलिप्तता दर्ज

ईओडब्ल्यू (Economic Offences Wing) और कोलार पुलिस के विभिन्न केसों में उसकी संलिप्तता दर्ज है। खासतौर पर एचडीएफसी बैंक के अकाउंट से धोखाधड़ी कर नगर निगम में प्लॉट बंधक रखवाकर उसकी रजिस्ट्री कराने का आरोप उसके ऊपर है। कोर्ट ने यह भी संज्ञान लिया कि लालघाटी स्थित जमीन के विवाद में कब्जा करने का मामला गांधी नगर थाने में पहले से दर्ज है, जिसमें पुलिस जांच कर रही है। फिलहाल दिलीप बच्चानी फरार चल रहा है और पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। हाई कोर्ट ने उसकी अंतरिम गिरफ्तारी पर लगे स्टे को भी निरस्त कर दिया है।

ईओडब्ल्यू ने भी जांच में तेजी ला दी

अब कोलार पुलिस और ईओडब्ल्यू किसी भी समय उसे गिरफ्तार कर सकती है।सूत्रों के अनुसार, दिलीप बच्चानी स्थानीय एक विधायक के हस्तक्षेप से पहले कई बार बचता रहा था, लेकिन इस बार हाई कोर्ट की सख्ती ने उसके बचाव के सारे रास्ते बंद कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईओडब्ल्यू ने भी जांच में तेजी ला दी है।

अब सक्रियता से कार्रवाई करने की तैयारी में

यह फैसला भूमाफियाओं और बिल्डर माफिया के खिलाफ राज्य में चल रही मुहिम को नई दिशा देता है। आम नागरिकों की जमीन हड़पने और बैंक धोखाधड़ी जैसे संगठित अपराधों पर लगाम कसने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पीड़ित पक्ष अब न्याय की राह पर आगे बढ़ने का भरोसा जता रहा है। कोर्ट का यह फैसला भू-माफिया और बेनामी संपत्ति कारोबारियों के लिए चेतावनी भरा संदेश है। प्रशासन और पुलिस अब सक्रियता से कार्रवाई करने की तैयारी में है।

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