देहरादून: उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य आंदोलन के शहीदों की स्मृति को संरक्षित करने को लेकर बड़ा ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिन शहीद आंदोलनकारियों की प्रतिमाएं अब तक स्थापित नहीं हुई हैं, उनकी प्रतिमाएं उनके पैतृक गांव या निवास क्षेत्र में उपयुक्त स्थान पर स्थापित की जाएंगी। यह घोषणा मुख्यमंत्री ने 2 अक्टूबर को मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहा में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान की थी।
रामपुर तिराहा के शहीदों की प्रतिमाओं का शिलान्यास
रामपुर तिराहा कांड के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए CM धामी ने उनकी प्रतिमाओं की स्थापना के कार्य का शिलान्यास भी किया। सरकार की ओर से इसके लिए 27 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त की गई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य आंदोलन के दौरान खटीमा, मसूरी, रामपुर तिराहा और श्रीनगर समेत कई स्थानों पर आंदोलनकारियों ने अलग उत्तराखंड राज्य के लिए अपना बलिदान दिया। उनके संघर्ष और बलिदान के परिणामस्वरूप ही उत्तराखंड अलग राज्य के रूप में अस्तित्व में आया।
शहीदों की स्मृति को संरक्षित करने पर जोर
CM धामी ने कहा कि राज्य आंदोलन के अमर बलिदानियों की स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी उद्देश्य से शहीदों की प्रतिमाएं उनके पैतृक गांवों या निवास क्षेत्रों में स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
उन्होंने रामपुर तिराहा स्थित राज्य अतिथि गृह के उच्चीकरण, स्मारक परिसर की लाइब्रेरी को ई-लाइब्रेरी में विकसित करने और संग्रहालय के विस्तार की भी घोषणा की। संग्रहालय में उत्तराखंड की पारंपरिक वेशभूषा, वाद्य यंत्रों और लोक संस्कृति से जुड़ी सामग्री को शामिल किया जाएगा।
आंदोलनकारियों के हितों का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों के सम्मान और हितों के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने राज्य आंदोलनकारियों के पुनः चिन्हीकरण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की बात भी कही।
सरकार के इस ऐलान के बाद अब उन शहीद आंदोलनकारियों की प्रतिमाओं की स्थापना की प्रक्रिया पर नजर रहेगी, जिनकी स्मृति में अभी तक प्रतिमा स्थापित नहीं की गई है।