उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ज्योलीकोट में दूषित पेयजल आपूर्ति के मामले में सरकार ने सख्त कार्रवाई की है। जन स्वास्थ्य से जुड़े इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में उत्तराखंड जल संस्थान और पेयजल निगम के छह वरिष्ठ अभियंताओं को निलंबित किया गया है। सरकार के मुताबिक, जिम्मेदारी तय करने और लापरवाही पर कार्रवाई में किसी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
छह वरिष्ठ अभियंता निलंबित
ज्योलीकोट में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर शिकायत सामने आने के बाद संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे। मामले को गंभीरता से लेते हुए सरकार ने जांच और कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। दायित्वों के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर जल संस्थान और पेयजल निगम से जुड़े छह वरिष्ठ अभियंताओं के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
जन स्वास्थ्य से जुड़ा मामला
सरकार ने इस कार्रवाई को जन स्वास्थ्य से सीधे जुड़े मामले के तौर पर देखा है। दूषित पेयजल की आपूर्ति से लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में पेयजल व्यवस्था की निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है। ज्योलीकोट प्रकरण में इसी स्तर पर लापरवाही को गंभीरता से लिया गया।
CM धामी की सख्ती
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही और भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की बात लगातार कहते रहे हैं। सरकार का कहना है कि आमजन की समस्याओं का समय पर समाधान उसकी प्राथमिकता है। इसी क्रम में सीएम हेल्पलाइन 1905 की भी नियमित समीक्षा की जा रही है, जिससे शिकायतों के निस्तारण को लेकर विभागों की जवाबदेही तय हो सके।
फर्जी प्रमाणपत्र मामले में भी कार्रवाई
ज्योलीकोट मामले से एक दिन पहले नीट यूजी-2026 की राज्य केंद्रीयकृत काउंसलिंग में फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर प्रवेश लेने का मामला भी सामने आया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इस मामले में अब तक आठ अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्र निरस्त किए जा चुके हैं। साथ ही संबंधित प्रवेश प्रक्रिया भी रद्द की गई है।