UK CM DHAMI: उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायतों में खालीपन, अध्यादेश को लेकर तकनीकी अड़चन

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UK CM DHAMI: उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायतों में खालीपन, अध्यादेश को लेकर तकनीकी अड़चन

uk cm dhami उत्तराखंड त्रिस्तरीय पंचायतों में खालीपन अध्यादेश को लेकर तकनीकी अड़चन

UK CM DHAMI: उत्तराखंड में ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायतों में प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, लेकिन नए प्रशासकों की नियुक्ति या चुनाव की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इसके चलते प्रदेश की 10,760 त्रिस्तरीय पंचायतें फिलहाल खाली हैं। पंचायतों में प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति के लिए पंचायती राज अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित है, लेकिन अध्यादेश को राजभवन से मंजूरी मिलने में तकनीकी पेच आड़े आ रहा है, खासकर हरिद्वार से जुड़े पुराने मामले के कारण।

[caption id="attachment_85351" align="alignnone" width="300"]UK CM DHAMI UK CM DHAMI[/caption]

UK CM DHAMI: पंचायतों में 1 जून को कार्यकाल समाप्त हुआ

पंचायती राज अधिनियम के अनुसार, यदि किसी कारणवश पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो पाते, तो राज्य सरकार छह माह के लिए प्रशासक नियुक्त कर सकती है। इसी आधार पर हरिद्वार को छोड़कर शेष जिलों की पंचायतों में छह महीने पहले प्रशासक नियुक्त किए गए थे, जिनका कार्यकाल अब समाप्त हो गया है। ग्राम पंचायतों में चार दिन पहले, क्षेत्र पंचायतों में दो दिन पहले और जिला पंचायतों में 1 जून को कार्यकाल समाप्त हुआ है।

UK CM DHAMI: कानून नहीं बन पाया

चुनाव न हो पाने की स्थिति में अब पुनः प्रशासकों की नियुक्ति की तैयारी है। इसके लिए राज्य सरकार ने अध्यादेश तैयार कर राजभवन भेजा, लेकिन विधायी विभाग ने इसे यह कहते हुए लौटा दिया कि एक जैसा अध्यादेश दोबारा नहीं भेजा जा सकता। इसका कारण यह है कि 2021 में हरिद्वार जिले में पंचायत चुनाव न होने की स्थिति में भी प्रशासकों की पुनर्नियुक्ति हेतु एक अध्यादेश लाया गया था। हालांकि, बाद में चुनाव हो जाने के कारण वह अध्यादेश विधानसभा से पास नहीं हुआ और कानून नहीं बन पाया।

UK CM DHAMI: दोबारा राजभवन भेजा गया

सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के अनुसार, यदि कोई अध्यादेश एक बार वापस लिया जा चुका हो, तो उसे फिर से उसी रूप में लाना संविधान के विरुद्ध माना जाता है। इसी आधार पर विधायी विभाग ने अध्यादेश को दोबारा उसी रूप में लाने पर आपत्ति जताई है। अब राज्य सरकार द्वारा कुछ संशोधन कर अध्यादेश को दोबारा राजभवन भेजा गया है।

ठहराव की स्थिति में पहुंच गई

फिलहाल प्रदेश की 7478 ग्राम पंचायतें, 2941 क्षेत्र पंचायतें और 341 जिला पंचायतें प्रशासनविहीन हो गई हैं। केवल हरिद्वार की 318 ग्राम पंचायतें इस स्थिति से बाहर हैं। पंचायत चुनाव की अनिश्चितता और कानूनी अड़चनों के बीच ग्रामीण शासन व्यवस्था ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है।

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