खड़े हनुमान मंदिर विवाद

उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर पर विवाद तेज, साध्वी हर्षानंद गिरी की दो टूक “मंदिर वहीं बनेगा,आस्था से खिलवाड़ नहीं!”

उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर को हटाने की कोशिशों का साधु-संतों ने विरोध किया। साध्वी हर्षानंद गिरी ने आस्था और परंपरा के सम्मान में मंदिर न हटाने की अपील की।

By : दिव्या मिस्त्री
उज्जैन में खड़े हनुमान मंदिर पर विवाद तेज, साध्वी हर्षानंद गिरी की दो टूक “मंदिर वहीं बनेगा,आस्था से खिलवाड़ नहीं!”

उज्जैन में ‘खड़े हनुमान मंदिर’ को शिफ्ट करने का विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मंदिर को हटाने के मुद्दे पर अब साधु-संत भी खुलकर सामने आने लगे हैं। साध्वी हर्षानंद गिरी मंदिर प्रांगण पहुंचीं, जहां उन्होंने बटुकों और संतों के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद उन्होंने मीडिया से बातचीत में मंदिर को हटाने की कोशिशों का विरोध किया और संत समाज से एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक मंदिर का मामला नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया कि विकास कार्यों के साथ धार्मिक भावनाओं का भी ध्यान रखा जाए और मंदिर को लेकर जल्दबाजी में कोई निर्णय न लिया जाए।

‘जानवर तो 7 फीट का गड्ढा नहीं खोदेगा’, मशीनों से प्रतिमा हटाने की कोशिश का दावा

मंदिर परिसर में प्रतिमा के आसपास किए गए निर्माण और खुदाई को लेकर साध्वी हर्षानंद गिरी ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि प्रतिमा के दोनों तरफ करीब सात फीट गहरे गड्ढे किए गए हैं। उनका कहना है कि ये गड्ढे किसी जानवर के जरिए नहीं खोदे गए, बल्कि भारी मशीनों के इस्तेमाल की आशंका है। साध्वी ने दावा किया कि प्रतिमा को स्थानांतरित करने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने प्रतिमा को सुरक्षित रखने की कोशिश की, जिसका वे सम्मान करती हैं, लेकिन पहले की कई कोशिशें सफल नहीं हुईं। ऐसे में अब दोबारा प्रतिमा को हटाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले में सावधानी बरतने की अपील की।

‘छोटा AIIMS’ है यह दरबार, आस्था से खिलवाड़ बंद करे प्रशासन

साध्वी हर्षानंद गिरी ने खड़े हनुमान मंदिर की धार्मिक मान्यता और श्रद्धालुओं की आस्था का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कई श्रद्धालु इस दरबार को ‘छोटा AIIMS’ मानते हैं और हनुमान जी को वैद्य के रूप में पूजते हैं। उनके मुताबिक देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां अपनी आस्था के साथ पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है, जहां भैरव बाबा, मां हरसिद्धि और खड़े हनुमान जी जैसे धार्मिक स्थलों का विशेष महत्व है। साध्वी ने इन धार्मिक स्थलों को हटाने की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से आस्था का सम्मान करने की मांग की। उन्होंने कहा कि वे उज्जैन में अयोध्या के रामलला जैसा वर्षों लंबा इंतजार नहीं देखना चाहतीं।

संत समाज से अपील, ‘मठों और गद्दियों से बाहर निकलकर साथ खड़े हों’

मंदिर विवाद को लेकर साध्वी ने संत समाज की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंदू समाज को एकजुट करने की बात करते हैं, उन्हें ऐसे समय में खुलकर सामने आना चाहिए। हर्षानंद गिरी ने कहा कि कई महामंडलेश्वर और संत मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे, लेकिन इस मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखने वाले लोगों की संख्या कम है। उन्होंने संतों से मठों, अखाड़ों और गद्दियों से बाहर निकलकर हनुमान जी के मंदिर के समर्थन में खड़े होने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर संत समाज आज अपनी आवाज नहीं उठाएगा तो भविष्य में धार्मिक स्थलों को लेकर और भी गंभीर परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं। उन्होंने टेंट में हनुमान जी के दर्शन की स्थिति को भी चिंता का विषय बताया।

एक ही मांग, मंदिर वहीं बने और भव्य स्वरूप दिया जाए

साध्वी हर्षानंद गिरी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सरकार के विकास कार्यों का विरोध करना नहीं है। उनकी मुख्य मांग मंदिर और प्रतिमा को लेकर है। उन्होंने कहा कि जहां हनुमान जी विराजमान हैं, उसी स्थान पर मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिमा को दूसरी जगह स्थानांतरित करने की किसी भी कोशिश को रोकने की मांग की। साध्वी का कहना है कि श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखते हुए उसी स्थान पर भव्य मंदिर बनाया जाए, ताकि धार्मिक परंपरा भी बनी रहे और विकास कार्य भी उचित तरीके से आगे बढ़ सकें। अब साधु-संतों के खुलकर सामने आने के बाद खड़े हनुमान मंदिर का यह विवाद आने वाले दिनों में और बड़ा राजनीतिक व धार्मिक मुद्दा बन सकता है।

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